पेट्रोल के बाद डीज़ल भी बाज़ार के हवाले

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केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में डीज़ल की क़ीमतों को सरकार के नियंत्रण से आज़ाद करते हुए उसे बाज़ार के हवाले कर दिया है.

इसका पहला प्रभाव ये हुआ कि डीज़ल के दामों में तीन रुपए 37 पैसों की कटौती हो गई. ये कटौती आज रात 12 बजे से लागू होगी.

कैबिनेट की बैठक के बाद शनिवार शाम केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी घोषणा की.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में आई गिरावट के बाद डीज़ल की क़ीमतों में ये कमी की गई है.

डीज़ल पर अब तक सरकार का नियंत्रण था. इस नए फ़ैसले का मतलब ये हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दाम के घटने या बढ़ने का सीधा असर भारत में खुदरा में बेचे जाने वाले डीज़ल की क़ीमत पर होगा.

पिछली यूपीए सरकार ने 2010 में पेट्रोल की क़ीमत को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करते हुए बाज़ार के हवाले कर दिया था.

प्राकृतिक गैस की क़ीमत

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Image caption वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट कमिटी की बैठक में लिए गए तीन महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की.

इसके अलावा कैबिनेट ने एलपीजी को डायरेक्ट बेनीफ़िट ट्रांसफ़र के साथ जोड़ने का भी फ़ैसला किया है. यानी आधार कार्ड और जन धन योजना के तहत बैंक में अकाउंट रखने वालों के खाते में सीधे तौर पर एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी जमा करा दी जाएगी. लेकिन जिनके पास अभी भी कोई बैंक अकाउंट नहीं है उनको पुराने तरीक़े से गैस सेलेंडर मिलते रहेंगे.

एक और महत्वपूर्ण फ़ैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की क़ीमत 5.61 डॉलर प्रति इकाई तय कर दी है.

एक नवंबर 2014 से नई क़ीमत लागू होगी और मूल्य में प्रत्येक छह महीने में संशोधन किया जाएगा. गैस मूल्य में अब अगला संशोधन एक अप्रैल 2015 को होगा.

इससे पहले यूपीए सरकार ने रंगराजन कमेटी की सिफ़ारिश के आधार पर प्राकृतिक गैस की क़ीमत को 4.2 डॉलर प्रति इकाई से बढ़ाकर 8.4 डॉलर प्रति इकाई करने का प्रस्ताव रखा था जो एक अप्रैल 2014 से लागू होने वाला था लेकिन चुनाव आयोग ने उस फ़ैसले के लागू करने पर पाबंदी लगा दी थी.

एक अन्य फ़ैसले में कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण को भी मंज़ूरी दे दी. इसमें लगभग 10,773 करोड़ रुपए की लागत आएगी.

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