वैष्णो देवी या शिरडी, घर में मिले 'प्रसाद'

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अखबारों और टेलीविज़न चैनलों पर ऑनलाइन शॉपिंग के रोज़ आने वाले विज्ञापनों का असर अब दूर-दराज़ के इलाकों से इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों पर भी देखा जा रहा है.

लोग अब मशहूर मंदिरों के प्रसाद का आनंद घर बैठे ले सकते हैं, बिना कतार में खड़े हुए.

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आध्यात्मिक चीजों का बाज़ार कितनी तेजी से बढ़ रहा है.

अभी जो अनुमान हैं, उनके मुताबिक इस कारोबार से जुड़ी कंपनियों की विकास दर 30 से 50 फीसदी तक है.

बढ़ता कारोबार

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ऐसी ही एक कंपनी 'ऑनलाइन प्रसाद' के सीईओ गुंजन मल बीबीसी से कहते हैं, "अगस्त से हमारा जन्माष्टमी का सीज़न शुरू हो जाता है और नवंबर तक दीवाली का बाज़ार रहता है. इस दौरान हमने कारोबार को 300 फ़ीसदी की दर से हर महीने बढ़ते देखा है."

'ऑनलाइन प्रसाद' भारत के 50 मंदिरों का 'प्रसाद' श्रद्धालुओं के दरवाजे पर 501 रुपये की कीमत पर पहुँचाता है.

प्रसाद के अलावा कंपनी ग्राहक के लिए अलग अलग तरह की पूजाएं भी करवाती है. इसकी लागत 501 रुपये से 51 हज़ार रुपये तक पड़ती है.

ऑनलाइन पूजा और प्रसाद की सेवाओं के दायरे में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के बड़े मंदिर आते हैं.

बड़ा दायरा

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इनमें वैष्णो देवी, शिरडी बाबा, सिद्धि विनायक, सोमनाथ, कामाक्षी, तिरुपति से लेकर रामेश्वरम मंदिर तक शामिल हैं.

लेकिन ऑनलाइन अध्यात्म के कारोबार में केवल 'प्रसाद' ही एकमात्र ऐसी चीज नहीं जो भक्तों के लिए उपलब्ध है.

'शॉपक्लूज़ डॉटकॉम' की सह-संस्थापक राधिका घई अग्रवाल कहती हैं, "फिलहाल बाज़ार तेज़ है और ग्राहक पूजा से जुड़ी चीजों के अलावा सजाने के काम आने वाला सामान भी मांग रहे हैं. इसमें यंत्र हैं, लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां हैं."

राधिका कहती हैं, "इस सीज़न में लक्ष्मी और गणेश की छोटी मूर्तियां तोहफे में देने का चलन देखा जा रहा है."

ये कारोबार केवल भारत की सरहदों के भीतर ही नहीं हो रहा है.

डिजिटल मार्केटिंग

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गुंजन मल कहते हैं, "अमरीका, कनाडा और दूसरे देशों से ऑर्डर आ रहे हैं. हम ग्राहकों के ऑर्डर कोरियर से भेजते हैं."

वे बताते हैं कि आध्यात्मिक चीजों का ऑनलाइन बाज़ार तकरीबन चार अरब डॉलर का है.

भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलूरु में डिजिटल मार्केटिंग की प्रोफ़ेसर सीमा गुप्ता कहती हैं कि इसमें कुछ आश्चर्यजनक नहीं है.

वे कहती हैं, "भारत में धर्म का दायरा बहुत बड़ा है. यह बस विश्वास की बात है. अगर कारोबार से जुड़े लोग ग्राहकों के भरोसे पर खरे उतरते हैं तो इसका फ़ायदा उन्हें ही होगा."

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