निठारी: कोली की फांसी की सज़ा बरक़रार

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निठारी हत्याकांड के सिलसिले में दोषी सुरेंदर कोली की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में कोली को रिम्पा हलदर की हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें मृत्युदंड देने का आदेश दिया था.

इसके बाद वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी.

इस ग्रुप का कहना था कि निठारी हत्याकांड में कोली के ख़िलाफ़ कुल 15 अन्य मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं और कोली को फांसी दिए जाने से बाक़ी मामलों में फ़ैसलों पर प्रभाव पड़ेगा.

लेकिन अदालत ने मंगलवार को ये दलील नहीं मानी. इससे पहले फांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ कोली की पुनर्विचार याचिका को अदालत ने ख़ारिज कर उन्हें फांसी देने का आदेश दिया था.

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Image caption कोली की माँ का कहना है कि फांसी से बाक़ी दोषियों को सजा नहीं मिल पाएगी.

निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंधेर को भी अभियुक्त बनाया गया था, लेकिन पहले मामले में उन्हें अदालत ने बरी कर दिया है. कोली पंधेर के यहाँ नौकरी करते थे.

पंधेर के ख़िलाफ़ बाक़ी केस निचली अदालतों में चल रहे हैं.

वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' का मानना है कि अदालत ने कोली के मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए इक़बालिया बयान को ही सज़ा का आधार बनाया है.

साल 2006 में उत्तर प्रदेश पुलिस को नोयडा के निठारी गाँव स्थित पंधेर के घर के पीछे और आसपास बच्चों और महिलाओ के कंकाल मिले थे.

उस समय पुलिस ने पंधेर और कोली पर क़रीब 19 बच्चों और महिलाओं की हत्या और बलात्कार का आरोप लगाया था.

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