जब मुंबई में नजर आया छोटा सा बिहार

मुंबई

'कांचे ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए' और 'केरवा जे फरेला घेवध से' की स्वर लहरियां जुहू बीच पर गूंजी, तो ऐसा लगा मानो एक छोटा सा बिहार ही मुंबई के इस बीच पर निकल आया हो.

सूर्य उपासना का पर्व छठ पूजा मुंबई में ख़ासे उल्लास से मनाया गया. अमूमन मुंबई में बिहारी और मराठी का मुद्दा हमेशा से सुनने में आता रहा है, लेकिन जुहू बीच पर क्या भोजपुरी, क्या मराठी सभी इस पूजा-पाठ में पूरी तरह से रमे नजर आए.

जुहू बीच पर पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था थी जहां पीले सिंदूर को नाक से मांग तक सजाए महिलाओं का रैला और गन्ने के गट्ठर सिर पर रखे पुरुष बड़ी संख्या में नजर आ रहे थे.

अपनी बहू और सास के साथ व्रत करने वाली आरती सिंह ने बताया कि वो पिछले बीस साल से इस व्रत को मुंबई में कर रही हैं.

कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा नूतन ने बताया, "मेरी मां भी इस व्रत को बड़े उत्साह से करती हैं. अमूमन यह वंश के लिए किया जाता है, खासकर लड़कों के लिए लेकिन मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं तो यह व्रत मेरे लिए होता है."

सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे डीसीपी दत्तात्रेय जाधव ने बताया, "इस बार पहले से कहीं अधिक पुलिस बल तैनात किया गया. महिलाओं की सुरक्षा की खास व्यवस्था की गई.''

पिछले कई वर्षों से छठ पूजा का आयोजन करने वाले कांग्रेसी नेता संजय निरुपम कहते हैं कि छठ पूजा करने वालों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है.

इस मौके पर लोगों का मनोरंजन के लिए भोजपुरी गायिका विजया भारती के साथ सोनू निगम भी मौजूद थे. कई पारंपरिक भोजपुरी गीतों के साथ बॉलीवुड के भी गानों का दौर चला.

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