छत्तीसगढ़ः गाय पशु है या माता?

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छत्तीसगढ़ में इन दिनों गाय को लेकर एक नई बहस शुरु हो गई है- गाय पशु है या माता.

असल में राज्य में गाहे-बगाहे गाय को छत्तीसगढ़ का 'राज्य पशु' घोषित करने की मांग होती रहती है.

हालत ये है कि पिछले महीने वन्यजीव सप्ताह के दौरान एक आयोजन में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक बीएन द्विवेदी ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ही उन पर वादा-ख़िलाफ़ी का आरोप लगाते हुए गाय को 'राज्य पशु' घोषित करने की मांग कर डाली.

ताज़ा बहस विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के उस बयान के बाद शुरु हुई है. इस बयान में उन्होंने विधानसभा के अगले सत्र में सरकारी आदेश लाकर “गौ माता” को “राष्ट्रीय पशु” घोषित करने की घोषणा की.

राज्य सरकार की 'छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग' से जुड़े रहे हरि जोशी कहते हैं, “गाय तो माता है, उसे पशु तो नहीं कहा जा सकता. दिक़्क़त ये है कि हम किसी भी तरह से गौ माता को बचाना चाहते हैं. इसलिए ज़रुरी है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए.”

सस्ती लोकप्रियता

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किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि गाय को राज्य या राष्ट्रीय पशु घोषित करने से कहीं अधिक ज़रुरी उसे बचाना है.

वे कहते हैं, “राज्य का कोई भी शहर ऐसा नहीं है, जहां सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में भूखी-प्यासी पॉलिथीन चबाती गायें नज़र न आती हों. भाजपा की सरकार में शामिल जो लोग गाय को माता कहते हैं, उनसे पूछने का मन करता है कि वे माता को पशु क्यों घोषित करने पर तुले हुए हैं?”

कांग्रेस पार्टी की आईटी सेल ने तो बक़ायदा विधानसभा अध्यक्ष के ख़िलाफ़ मोर्चा ही खोल दिया है.

सेल के राज्य सचिव प्रकाश मणि वैष्णव का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष केवल सस्ती लोकप्रियता के लिए इस तरह की बात कर रहे हैं.

वैष्णव नाराज़गी जताते हुए कहते हैं, “हिंदू समाज में गाय की क्या अहमियत है, यह विधानसभा अध्यक्ष को बताने की ज़रुरत नहीं है. वे गाय को राज्य पशु घोषित करने के बजाए राज्य में गायों की लगातार घटती संख्या के बारे में सोचते तो ज़्यादा बेहतर होगा.”

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