मणिपुर: आँसुओं को पोंछने वाले का इंतज़ार

मणिपुर

लंबे समय से हिंसाग्रस्त पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में कई संगठन विवादित आफ़्स्पा क़ानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

आर्म्ड फ़ोर्सेज़ स्पेशल पावर ऐक्ट या आफ़्स्पा क़ानून के तहत राज्य में तैनात सशस्त्र बलों को बिना वॉरंट के लोगों के घरों की तलाशी लेने समेत कई विशेषाधिकार हैं.

बर्मा की सीमा से सटे मणिपुर में कई चरमपंथी गुट सक्रिय हैं. राज्य पिछले कई सालों से हिंसा का शिकार है.

सेना पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वह इस विशेषाधिकार की आड़ में फ़र्ज़ी मुठभेड़ कर कई बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है.

फ़ोटोग्राफ़र कारेन डियास ने इसी तरह की कुछ घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवार से मुलाक़ात की

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मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में गंगारानी कोंगखेंग के पति डेबान कोंगखेंग की वैन पर थोबुल ज़िला पुलिस ने गोलियां चलाईं जिसमें उनकी मौत हो गई.

सरकार ने दोषियों को सज़ा देने के भरोसे के साथ उन्हें मुआवज़ा देने का भी ऐलान किया.

लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी गंगारानी आज भी इंतज़ार कर रही हैं.

38 साल की गंगारानी की नज़र कमज़ोर है और उन पर अपने दो बच्चों को पालने की भी ज़िम्मेदारी है.

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वांगखेम चंद्रकला के पति नमोईजन लुखोई की 21 अप्रैल 2008 को उनके घर के बाहर दो अज्ञात बंदूक़धारियों ने हत्या कर दी थी. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया.

वांगखेम को डर था कि इससे उनके चार छोटे-छोटे बच्चों पर भी मुसीबत आ सकती है.

उन्होंने कहा, "अपने पति की मौत के बाद मैं डिप्रेशन यानी अवसाद में चली गई. बार-बार श्मशान घाट चली जाती. मेरे पड़ोसी और परिवार वाले मुझ पर नज़र रखते थे कि मैं कहीं अपने आपको कुछ कर ना बैठूं."

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रोनी के पति मुतुम हीरोजित की 13 अक्तूबर 2008 को हत्या कर दी गई.

इसका पता उन्हें टीवी पर समाचार देखते हुए लगा.

वह कहती हैं, "मुझे इंसाफ़ चाहिए. मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि राज्य में हिंसा और हत्याओं का दौर बंद हो चाहिए. वर्ना मणिपुर विधवाओं का राज्य बनकर रह जाएगा."

फ़ोटो में रोनी अपने नौ साल के बच्चे मुतुम मीर के साथ नज़र आ रही हैं.

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नीना निंगोमबाम के पति मिशेल 2008 में मारे गए थे.

मणिपुर पुलिस के मुताबिक़ वह चरमपंथी थे और भागने के प्रयास में मारे गए.

पति की मौत के बाद नीना ने राज्य की दूसरी हिंसा से पीड़ित विधवाओं से हाथ मिलाया और एक संगठन बनाया.

उनके संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें सशस्त्र सेनाओं के हाथ मारे गए लोगों से संबंधित 1528 केसों का ब्यौरा है.

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इस फ़ोटो में पीड़ित परिवार अपने मारे गए सदस्यों की तस्वीर लिए हुए नज़र आ रहे हैं.

नीना निंगोमबाम ने जो संगठन बनाया है वह इन पीड़ित परिवारों को सहारा और सलाह देता है.

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