इसराइल में राजनाथ की यात्रा पर क्यों है उत्साह?

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भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की इस बार की इसराइल यात्रा को काफ़ी अहमियत दी जा रही है.

साल 2000 में एनडीए सरकार के गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की यरूशलम यात्रा के बाद किसी भारतीय मंत्री की यह पहली इसराइल यात्रा है.

द्विपक्षीय संबंधों पर इस यात्रा का क्या असर हो सकता है यह समझने के लिए बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की यरूशलम में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार हरिंदर मिश्रा से.

यरूशलम से पत्रकार हरिंदर मिश्रा

राजनाथ सिंह के दौरे को इसराइल में काफ़ी महत्व दिया जा रहा है.

राजनाथ के दौरे के एजेंडे में यूँ तो कुछ भी नया नहीं है लेकिन ख़ास बात यह है कि जबसे भारत में बीजेपी सरकार बनी है तबसे इसराइल में काफ़ी उत्साह है.

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नेताओं और अधिकारियों का मानना है कि पिछली बीजेपी (एनडीए) सरकार में भारत-इसराइल के संबंध शीर्ष पर थे, ऐसा फिर हो सकता है.

इसके साथ ही दोनों देशों के बीच गतिविधियां भी तेज़ हुई हैं. दोनों देशों के बीच बहुत सारी यात्राओं की योजना बनाई जा रही है. मुलाक़ातें भी ऊंचे स्तर पर हो रही हैं. इसराइली प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क में भारतीय प्रधानमंत्री से मिले थे.

राजनाथ की यात्रा को बहुत ज़्यादा महत्व दिया जा रहा है और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री सभी से उनकी मुलाक़ात होगी और ये बैठकें काफ़ी लंबी होंगी.

'मेक इन इंडिया'

राजनाथ सिंह की इस बैठक में किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद तो नहीं है.

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दरअसल फ़रवरी में होमलैंड सिक्योरिटी पर दोनों देशों के बीच एक अनुबंध हुआ था. उसके बाद एक संयुक्त संचालन समिति भी बनी थी उसकी एक बैठक सितंबर में हो भी चुकी है.

भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए 'मेक इन इंडिया' अभियान पर बात हो सकती है. राजनाथ सिंह इसराइल के निवेशकों को कह सकते हैं कि वह भारत में निवेश करें और वहां उत्पादन संयत्र लगाएं.

इसके अलावा मूलतः यहां समीक्षा बैठकें होंगी और चरमपंथ पर सहयोग को लेकर चर्चा होगी.

फ़लस्तीन

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उधर फ़लस्तीनी अधिकारियों या नेताओं का कोई बयान राजनाथ की यात्रा को लेकर नहीं आया है लेकिन फ़लस्तीनी लोगों के बीच इसे लेकर चर्चा ज़रूर हो रही है. ख़ासतौर पर भारत जा चुके और वहां पढ़ चुके युवाओं के बीच.

भारत सरकार हर साल करीब 100 फ़लस्तीनी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देती है और वे वहां कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते हैं. उनका भारत को लेकर ख़ासा लगाव रहता है.

इन लोगों को लगता है कि नई बीजेपी सरकार का फ़लस्तीनियों के प्रति जो नज़रिया है, वह रूखा होता जा रहा है.

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