नसबंदी मामलाः चार डॉक्टर निलंबित

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी चिकित्सा शिविर में 11 महिलाओं की मौत के मामले में राज्य सरकार ने चार डाक्टरों को निलंबित कर दिया है.

राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह को पद से हटाया गया है और मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

शनिवार को पेंडारी में एक सरकारी शिविर लगा था. ग्रामीणों ने दावा किया है कि शिविर में एकमात्र डॉक्टर ने अपने सहयोगी के साथ महज़ छह घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन किया.

चिकित्सकों का कहना है कि तीस महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें अधिकतर की हालत गंभीर है.

'हत्या का मामला दर्ज करें'

निलंबित होने वाले चिकित्सकों में ऑपरेशन करने वाले डॉ. आरके गुप्ता समेत नसबंदी कार्यक्रम के राज्य समन्वयक केसी उरांव, ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरके भांगे और प्रखंड चिकित्सा अधिकारी प्रमोद तिवारी हैं.

डॉ. गुप्ता को पिछले साल ही 50 हज़ार महिलाओं के आपरेशन करने के लिये पुरस्कृत किया गया था.

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नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए और विपक्ष इस मांग को लेकर राज्य भर में प्रदर्शन करेगा.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इस पूरे मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है.

पहले अधिकारियों ने किसी भी लापरवाही से इनकार किया था.

पहला मामला नहीं

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने बीबीसी को बताया, “हमने इस पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है. इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ हम सख्त कार्रवाई करेंगे. फिलहाल हमारा पूरा ध्यान बीमार महिलाओं को सुचारु इलाज उपलब्ध कराने में है.”

इससे पहले नसबंदी ऑपरेशन के दौरान ही जनवरी 2012 में बिहार में दो घंटे में 53 महिलाओं का ऑपरेशन करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

इन लोगों ने खुले मैदान में बिना बेहोश किए ये ऑपरेशन किए थे.

परिवार नियोजन

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इस बात के भी आरोप लगते रहे हैं कि ग़रीब परिवारों की महिलाओं को नसबंदी के लिए पैसे दिए जाते हैं.

नसबंदी शिविर में कभी कभार सामूहिक रूप से पुरुषों और महिलाओं को नसबंदी के लिए तैयार किया जाता है.

छत्तीसगढ़ में प्रशासन पुरूष नसबंदी पर 1100 रुपए और महिला नसबंदी पर 600 रुपए की प्रोत्साहन राशि देता है.

1970 के दशक में नसबंदी का राष्ट्रीय अभियान शुरू हुआ था लेकिन हज़ारों पुरुषों और महिलाओं का जबरदस्ती ऑपरेशन किए जाने की शिकायतों के बाद इसे बंद कर दिया गया.

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