सवर्ण विदेशों से आए: मुख्यमंत्री मांझी

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बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के सवर्ण जातियों के बारे में दिए गए एक ताज़ा बयान से एक नया विवाद खड़ा हो गया है.

ग्यारह नवंबर को मांझी ने बेतिया में कहा कि सवर्ण जातियों के लोग विदेशी हैं और यहां (भारत) के मूलनिवासी आदिवासी और अनुसूचित जनजाति के लोग हैं.

उनकी ही पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बयान से किनारा कर लिया. विपक्षी दलों ने इस बयान को समाज में तनाव बढ़ाने वाला क़रार दिया है.

इस साल पद संभालने के बाद से ही अपने बयानों को लेकर बार-बार विवादों में रहे हैं.

मांझी के बयानों से उपजे पांच विवाद

1. अक्तूबर में मांझी ने कहा कि वह चाहते हैं कि सूबे का अगला मुख्यमंत्री गया से हो. मांझी मूल रुप से बिहार के गया जिले से आते हैं.

उधर जद (यू) बार-बार दोहराती रही है कि अगला विधानसभा चुनाव पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगी और नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे.

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2. सितंबर में उन्होंने पटना में दावा किया था कि 18 अगस्त को मधुबनी जिले के परमेश्वरी मंदिर से उनके पूजा कर लौटने के बाद मूर्तियों को धुलवाया गया.

मुख्यमंत्री के अनुसार इसके बारे में उनके मंत्रिमंडल सहयोगी रामलखन राम रमण ने उन्हें बताया. इस मामले में प्रशासनिक जांच चल रही है.

रमण ने मुख्यमंत्री के दावे पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था. हालांकि उन्होंने माना था कि उस इलाके में आज भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं.

3. सितंबर के ही कार्यक्रम में मांझी ने दावा किया था कि बिहार में अनुसूचित जाति की आबादी 22 से 23% है. उन्होंने कहा कि अगर वे एक हो जाएं तो अगला मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति से होगा.

मांझी के इस बयान के बाद जद(यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने अपनी पार्टी लाइन को दोहराते हुए कहा कि अगले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे.

4. अगस्त में एक सरकारी कार्यक्रम में मांझी ने कहा था कि बिजली बिल कम करवाने के लिए उन्होंने पांच हजार रुपए घूस में दिए थे.

मांझी ने यह भी कहा कि बाद में उन्होंने उस अधिकारी की शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी और जांच के बाद उसे जेल भी भिजवाया. हालांकि बाद में वो अपने बयान से पटल गए.

मुख्यमंत्री के इस बयान से पूर्ववर्ती नीतीश सरकार की इस छवि को एक और धक्का लगा कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार घटा था.

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5. अक्तूबर में पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल में उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर अपना काम ईमानदारी से नहीं करेंगे तो उनका हाथ काट दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री के शब्द थे, "जो गरीबों के साथ खिलवाड़ करेंगे उनका हम हाथ काट लेंगे."

इस बयान पर इंडियन मेडिकल एसोसियेशन की बिहार इकाई ने गंभीर आपत्ति जताई थी. विवाद होने के बाद मांझी ने कहा था कि वह अपने बयान में मुहावरे का प्रयोग कर रहे थे.

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