लंगूर देंगे राष्ट्रपति को 'सुरक्षा कवच'

राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात लंगूर इमेज कॉपीरइट ATUL CHANDRA

मथुरा के बंदरों में एक अजीब शौक है. दर्शन के लिए आए भक्तों के धूप का चश्मा वे छीन लेते हैं. चाहे चश्मा जेब में हो या लगा हुआ.

उनके इस व्यवहार और उनकी भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए मथुरा प्रशासन ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सुरक्षा के लिए 10 लंगूरों की एक छोटी सेना तैयार की है.

प्रणब मुखर्जी 16 नवंबर को वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के गर्भगृह के शिलान्यास समारोह के लिए मथुरा जा रहे हैं. इसके बाद वह बांके बिहारी मंदिर भी जाएंगे जहां बंदरों का आतंक सबसे ज़्यादा है.

मथुरा की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंज़िल सैनी ने बताया राष्ट्रपति का काफिला जिस रास्ते से गुज़रेगा उस दिन ये लंगूर तैनात रहेंगे.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

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Image caption राष्ट्रपति की वृंदावन यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

सैनी के अनुसार, कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट से एक हज़ार रुपए प्रति लंगूर प्रति दिन की दर से किराए पर लिए गए हैं. यह राशि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना में 125 रुपये प्रतिदिन मिलने वाली मज़दूरी से कई गुना ज़्यादा है.

कृष्ण जन्मभूमि न्यास के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि उनके पास सिर्फ दो लंगूर हैं जो राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हैं. न्यास इन लंगूरों के लिए 14,000 रुपए प्रति माह खर्च करता है. बाकी आठ लंगूर कहीं और से लाए गए हैं.

वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के जनसंपर्क और वीआईपी सत्कार के इंचार्ज नवीन कहते हैं कि इस मंदिर में बंदरों का कोई भय नहीं है. हेलिपैड से मंदिर बस चंद कदम पर है.

राष्ट्रपति के आगमन से पहले पूरे रूट को पुलिस, एनएसजी, एसपीजी और सेना के हवाले कर दिया जाएगा.

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