सिन्हा ने जो किया, अनुचित है: जोगिंदर

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रंजीत सिन्हा मामले में जो भी हुआ, वह ग़लत हुआ. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक का किसी अभियुक्त से घर में मिलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.

मैं भी सीबीआई का निदेशक रहा हूं..और भी हाई प्रोफ़ाइल निेदेशक रहे हैं, जिन्होंने चारा घोटाले, बोफोर्स घोटाले से लेकर टेलीकॉम घोटाले तक की जांच की.

लेकिन किसी मामले के अभियुक्त से मिलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है.

अभियुक्त से मिलने की एक प्रक्रिया है. वह जांच अधिकारी से मिलकर पूछ सकता है कि मेरा कसूर क्या है. इसके लिए एक बहुत बड़ी 'हाइरार्की' है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता.

ग़लत व्यवहार

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कोई व्यक्ति कितना भी ईमानदार क्यों न हो, अगर वह इस तरह का काम करता है, तो शक़ होना स्वाभावित है कि क्यों कोई समझौता हुआ है. इसलिए रंजीत सिन्हा का यह व्यवहार पूरी तरह से ग़लत है.

रंजीत सिन्हा के नैतिककता के आधार पर इस्तीफ़ा देने का भी अब कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है. अब उनकी नौकरी में दिन ही कितने बचे हैं. अगले महीने की दो तारिख़ को वो रियाटर हो रहे हैं.

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पहली बात यह कि अब उनके इस्तीफ़े पर किसी को विश्वास नहीं होगा. दूसरी बात यह कि उन्होंने जो किया है, वह अनुचित व्यवहार है, ग़ैरक़ानूनी नहीं. इसलिए उनके इस्तीफ़े का कोई मतलब नहीं है.

मैं इस बात पर हैरान हूं कि चीजों को इस तरह से होने कैसे दिया गया. लेकिन यह कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है.

आपको यह याद रखना होगा कि किन लोगों के मामले ख़त्म किए गए हैं. आपको उनके नाम याद रखने होंगे. कोई न कोई व्यक्ति याचिका दायर कर ऐसे लोगों को सामने लाने का काम करेगा. मीडिया भी चीजों को खोज-खोजकर बाहर निकालेगा. वह बताएगा कि क्या-क्या हो रहा है.

(बीबीसी संवाददाता मुकेश शर्मा से हुई बातचीत पर आधारित)

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