तीन सौ किमी चल कर कानपुर पहुँचा बाघ

बाघ के क़दमों की निशान तलाश करता एक व्यक्ति. इमेज कॉपीरइट Rohit Ghosh

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र से भागे हुए एक बाघ ने कानपुर शहर के पास गंगा के एक टापू पर शरण ली है.

बाघ के मौजूद होने की ख़बर से कानपुर के लोग सहमे हुए हैं. पुलिस और वन विभाग भी सतर्क हो गया है.

कानपुर के ज़िला वन्य अधिकारी राज कुमार ने बीबीसी को बताया, "गंगा में सात-आठ किलोमीटर लंबा और एक किलोमीटर चौड़ा टापू है. टापू पर पहाड़ीपुर नाम का एक गाँव है. बाघ के उसी गाँव में छिपे होने की आशंका है."

हाथी घास में छिपा बाघ

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Image caption वन विभाग और पुलिस के कर्मचारी अभी भी बाघ की तलाश में लगे हुए हैं

उनके अनुसार बाघ के पहाड़ीपुर गाँव में पदचिन्ह मिले हैं और उसने एक गाय को भी मारा है.

वन्य अधिकारी राज कुमार ने कहा, "टापू का एक बड़ा हिस्सा हाथी घांस से भरा है जो बाघों के छुपने की उपयुक्त जगह है. हमारे हिसाब से बाघ वहीं छिप कर सुस्ता रहा है."

उन्होंने कहा की बाघ को पकड़ने के लिए टापू में एक पिंजड़ा रखा गया है.

वन विभाग और पुलिस के हथियारबंद सिपाही पहाड़ीपुर में तैनात किए गए हैं. लोगों को भी चौकन्ना रहने और अकेले घर से बाहर न निकलने के लिए कहा गया है.

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ज़िला वन्य अधिकारी ने कहा कि यह बाघ लखीमपुर खीरी के जंगल से निकल कर, करीब 300 किलोमीटर का फ़ासला तय करता हुआ कानपुर पहुँचा है.

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