लोहिया के शिष्य मुलायम का 'शाही' जन्मदिन

मुलायम सिंह, मायावती इमेज कॉपीरइट AFP

15 जनवरी 2003 को उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिस धूम-धाम से अपना जन्मदिन मनाया था उसकी समाजवादी पार्टी ने कड़े शब्दों में निंदा की थी. आज उसी समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह को शाही अंदाज़ में जन्मदिन मनाने के लिए निंदा का शिकार होना पड़ रहा है.

मायावती ने अपने जन्मदिन को आर्थिक सहयोग दिवस के रूप में मनाया था और अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं, मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों को जन्मदिन के लिए चंदा इकठ्ठा करने के लिए कूपन बंटवाए थे. विशालकाय केक काटते समय 'दलित की बेटी' के हीरों की सब जगह चर्चा रही.

आज़म ख़ान या मुलायम सिंह ने भले ही इस मौक़े पर आर्थिक सहयोग के नाम पर चन्दा ना इकठ्ठा किया हो, लेकिन शुक्रवार को लोहिया के शिष्य और समाजवाद के इस समय सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव का 75 वां जन्मदिन जिस तरह से रामपुर में मनाया गया उसने मायावती के जन्मदिन की भव्यता को बहुत पीछे छोड़ दिया है.

रामपुर समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे और कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान का चुनाव क्षेत्र है.

जन्मदिन मनाने के लिए इंग्लैंड से विशेष रूप से बग्घी मंगाई गई थी और दिल्ली से ख़ास तौर पर बनवाए गए 75 फ़ीट का केक काटा गया. मुलायम सिंह की लम्बी आयु में पहली बार इस तरह से उनका जन्म दिन मनाया गया है.

'जले पर नमक'

Image caption जन्मदिन की सारी तैयारी आज़म ख़ान ने की थी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "मुलायम सिंह जी साम्यवाद आंदोलन के पुरोधा हैं और वे दीर्घायु हों ऐसी मेरी शुभकामना है. लेकिन आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया की विचारधारा के वंशज होने के नाते उनका इस तरह से जन्मदिन मनाना प्रदेश में अभाव से उत्पीड़ित जनता के जले पर नमक छिड़कना है. अगर वो अपना जन्मदिन ग़रीबों की बस्ती में मनाते तो अच्छा होता.''

बहुजन समाज पार्टी के नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, "वो (मायावती) हमेशा अपना जन्मदिन सादगी से मनाती हैं. इस तरह का तमाशा उन्होंने कभी नहीं किया".

मुलायम के जन्मदिन के आयोजन को ग़लत ठहराते हुए मौर्य ने कहा की मुलायम ने इस तरह से जन्मदिन मना कर लोहिया के विचारों को चांटा मारा है और समाजवाद का मख़ौल उड़ाया है.

राजनीतिक विचारक प्रोफ़ेसर एस के द्विवेदी को डर है कि जन्मदिन मनाने का स्तर कैसा हो कहीं इसी पर प्रतिस्पर्धा ना शुरू हो जाए.

वो कहते हैं, ''मेरा केक उसके केक से छोटा क्यों, यदि ऐसी मानसिकता नेताओं में आ गई तो लोकतंत्र के लिए वह दिन अत्यंत दुखद होगा."

पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि मुलायम जो हमेशा मायावती के जन्मदिन मनाने के तरीक़े की भर्त्सना करते थे आज ख़ुद उसी जाल में फँस गए हैं. शरत प्रधान के अनुसार मुलायम सिंह को लगता है कि आज़म ख़ान की हर बात मानकर उनको मुस्लिम वोट मिल जाएगा.

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