पत्नी की क़ीमत गाय से कम

  • 23 नवंबर 2014
हरियाणा की गुलाम दुल्हनें

हरियाणा के आस मोहम्मद ने अपनी पत्नी को एक बिचौलिये से क़रीब साढ़े तीन हज़ार रुपए में ख़रीदा था.

यह राशि एक गाय की क़ीमत से भी कम है, लेकिन उन्हें इसका कोई अफ़सोस नहीं.

मोहम्मद कहते हैं, "यह बात सही है कि मेरी पत्नी की क़ीमत एक गाय से भी कम है, लेकिन अगर मेरे बच्चों के लिए दुल्हन नहीं मिली तो मैं वही दुहराउंगा जो मैंने किया."

आठ बच्चों की मां यह महिला कहती हैं कि उनकी ज़िंदगी ग़ुलामों जैसी है, "जब मैं 12 वर्ष की थी तब मेरे पति मुझे यहां ले आए थे. वह मुझे पीटते रहे हैं, लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर सकती थी क्योंकि मैं कहीं नहीं जा सकती थी."

भारत के कुछ हिस्सों में दुल्हन ख़रीदने की प्रथा अभी भी है और हरियाणा में यह समस्या और गंभीर है.

लिंग अनुपात

Image caption आस मोहम्मद कहते हैं, "मेरे बच्चों की शादी नहीं होगी तो मैं उनके लिए भी दुल्हनें ख़रीदूंगा."

महिलाओं के प्रति पुरातन पूर्वाग्रह और अल्ट्रासाउंड जैसी लिंग जांच की आधुनिक तकनीक के चलते कन्या भ्रूण का गर्भपात मुमकिन हो गया है.

यही कारण है कि देश के कुछ हिस्सों में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के मुकाबले काफ़ी कम है.

बेहतर ज़िंदगी की उम्मीद में हज़ारों महिलाएं और लड़कियों को बरगलाया जाता है और उन्हें विवाह के लिए बेच दिया जाता है.

कभी-कभी तो उनका अपहरण भी कर लिया जाता है.

बिचौलिये इस तरक़ीब से तो पैसा बना लेते हैं लेकिन पीड़िता को ताज़िदगी हिंसा और यौन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है.

ज़बर्दस्ती

एक बिचौलिये ने बताया, "मैंने ख़ुद एक अन्य बिचौलिये से अपनी पत्नी ख़रीदी है. इसके बाद मैंने अपने परिवार को चलाने के लिए यही काम शुरू कर दिया."

इस बिचौलिये का मानना है कि वह एक अच्छा काम कर रहा है और इससे दोनों पक्षों का भला होता है.

एक सड़क किराने झोपड़ी बनाकर अपने बच्चों के साथ रहने वाली रोशनी कहती हैं कि उनके पति की मौत के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया.

पति के भाई ने ज़बर्दस्ती शादी करनी चाही लेकिन रोशनी ने मना कर दिया.

लैंगिक पूर्वाग्रह के बीज इतने गहरे हैं कि जन्म से पूर्व भी लड़के-लड़की में भेदभाव बरता जाता है.

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