संस्कृत अनिवार्य भाषा नास्ति!

  • 23 नवंबर 2014
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी इमेज कॉपीरइट Getty

मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि संस्कृत को अनिवार्य भाषा नहीं बनाया जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि "त्रिभाषा फार्मूला स्पष्ट है जिसमें कहा गया कि आठवीं अनुसूची की 23 में से किसी भाषा को छात्र चुन सकते हैं", ऐसे में संस्कृत को अनिवार्य भाषा नहीं बनाया जा सकता.

स्मृति ईरानी ने शिक्षा के भगवाकरण के आरोपों को ग़लत ठहराते हुए कहा, "जो लोग मुझ पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रतिनिधि होने का आरोप लगाते रहे, दरअसल वे हमारे अच्छे कामों से जनता का ध्यान हटाना चाहते हैं. उनका ये एजेंडा जारी है."

दरअसल, कुछ ही दिनों पहले स्मृति ईरानी के नेतृत्व में केंद्रीय विद्यालय बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया था कि देश के 500 से अधिक केंद्रीय विद्यालयों में त्रिभाषा फॉर्मूला के तहत जर्मन की जगह संस्कृत तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी.

उन्होंने कहा कि जिस तरह एक सहमति पत्र के ज़रिए संस्कृत की जगह जर्मन भाषा को केंद्रीय विद्यालय में लाया गया था वह संविधान के प्रतिकूल था और उस सहमति पत्र पर किस तरह हस्ताक्षर हुए इसकी जाँच चल रही है.

Image caption देश भर में 500 से अधिक केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ाई जाती है.

इससे पहले उन्होंने तीसरी भाषा के रूप में जर्मन की जगह संस्कृत को लाए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि मौजूदा व्यवस्था संविधान का उल्लंघन करती है.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि जर्मन एक विदेशी भाषा की तरह पढ़ाई जाती रहेगी जैसे फ्रेंच, स्पेनिश या चीनी भाषा पढ़ाई जाती है.

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