कश्मीर: बारिश बनी केसर की दुश्मन

  • 29 नवंबर 2014
कश्मीर में केसर की खेती इमेज कॉपीरइट Other

कश्मीर घाटी में सितंबर में कई दिनों तक हुई बारिश ने दुनिया भर में मशहूर कश्मीरी केसर की फ़सल को बेहद नुक़सान पहुंचाया.

इस कारोबार से जुड़े हज़ारों लोग प्रभावित हैं. कश्मीर में केसर की सबसे बड़ी खेती पम्पोर में होती है.

यहां 32 हज़ार एकड़ ज़मीन पर इसकी पैदावार होती है. पम्पोर के बाद ज़िला बडगाम में केसर उगाई जाती है.

माजिद जहांगीर की रिपोर्ट

इस साल जब फ़सल तैयार होने को थी तो कश्मीर में कई दिन तक लगातार बारिश चली. इस वजह से केसर के फूल भी नहीं खिल पाए.

इमेज कॉपीरइट Other

जम्मू कश्मीर केसर एसोसिएशन के पब्लिसिटी सेक्रेटरी गुलाम मोहिदीन भट मौसम की लगातार तब्दीली को इस साल केसर की फ़सल की तबाही का कारण मानते हैं.

वह कहते हैं, "जब हम केसर का बीज बोते हैं तो इसके अंदर से दो-तीन पत्ते निकलते हैं, पर इस बार केसर की ज़मीन में कई दिन तक बारिश का पानी जमा रहा. इससे तीन पत्तों की जगह दस पत्ते निकल आए. इससे बीच में बहुत ज़्यादा नमी पैदा हुई और नतीजा ये हुआ कि केसर के फूल खिल न सके. अगर कुछ खिले भी हैं तो वह बहुत ही कम."

पैदावार सिर्फ़ तीन टन

इमेज कॉपीरइट Other

भट का कहना है कि इस साल केसर की कुल पैदावार तीन टन तक ही हुई है, "इस बार केसर की जो कुल बिक्री है वह 25 करोड़ है जबकि पिछले साल तीन अरब की पैदावार हुई थी."

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2013 में कश्मीर में केसर की पैदावार 15 टन हुई थी.

भट का कहना है कि इस साल केसर की फसल को नुक़सान के कारण बाजार में भी भाव बढ़ गए हैं. बाजार में आजकल केसर के 10 ग्राम की कीमत 1600 रुपए तक पहुंच गई है जबकि दो महीने पहले 10 ग्राम की कीमत 1100 से 1200 सौ थी.

चार गुना पानी

इमेज कॉपीरइट MAJID JAHANGIR
Image caption कश्मीर का एक केसर उत्पादक किसान.

शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर के विज्ञान और तकनीकी विभाग के प्रोफेसर बीबीआई नवी कहते हैं, "जब केसर की फ़सल तैयार हो रही थी, तब 300 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. मतलब यह कि फ़सल को जितना पानी चाहिए था उससे चार गुना ज़्यादा पानी चला गया."

दुनिया में सिर्फ तीन-चार देशों में ही केसर उगाया जाता है. जानकारों के मुताबिक़ कश्मीर में उगने वाले केसर की क्वालिटी को पहला दर्जा हासिल है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार