शीतकालीन सत्रः कानून बन पाएंगे ये विधेयक!

  • 24 नवंबर 2014
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संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है.

22 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में संसद की आखिरी बैठक 23 दिसंबर को होगी. संसद के समक्ष फिलहाल 67 विधेयक लंबित हैं.

इनमें से नौ विधेयक संसद के पिछले सत्र में पेश किए गए थे जबकि 40 विधेयक पंद्रहवीं लोकसभा के दौरान मनमोहन सिंह की पिछली सरकार ने संसद के सामने विचार के लिए रखे थे.

18 ऐसे विधेयक हैं जो पिछली लोकसभाओं से लंबित पड़े हुए हैं.

लंबित अध्यादेश

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सरकार ने पिछले कुछ महीनों में दो अध्यादेश जारी किए हैं. जो कोयला खनन और सरकारी कपड़ा कंपनियों से संबंधित हैं.

इन दोनों अध्यादेशों को कानून की शक्ल देने के लिए संसद के मौजूदा सत्र में विधेयक लाया जाना है ताकि इन्हें खत्म होने से बचाया जा सके.

जो विधेयक लंबित हैं, उनमें 11 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित हैं. ये विधेयक मानसिक स्वास्थ्य, मेडिसिन सेक्टर और एचआईवी की रोकथाम से संबंधित हैं.

शीतकालीन सत्र में संसद को श्रम और रोज़गार क्षेत्र से जुड़े नौ विधेयकों पर भी विचार करना है. इनमें फैक्ट्री (संशोधन) बिल और अप्रैंटिस अमेंडमेंट बिल हैं.

शीतकालीन सत्र

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दोनों ही विधेयकों को संसद के पिछले सत्र के दौरान पेश किया गया था. अप्रैंटिस अमेंडमेंट बिल को लोकसभा पहले ही पास कर चुकी है.

लेकिन बाल श्रम (निषेध और नियमन) बिल, 2012 और भवन निर्माण क्षेत्र से जुड़े कामगारों के लिए 2013 में लाया गया विधेयक अब भी लंबित है.

संसद में लंबित कई विधेयक तो ऐसे हैं जिन पर स्टैंडिंग कमेटी को विचार करना है. इनमें शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा विधेयक भी है.

यह देखना बाक़ी है कि इन विधेयकों को शीतकालीन सत्र के दौरान पारित करने के लिए स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट वक्त पर आ जाती है या नहीं.

राज्यसभा

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बीमा संशोधन विधेयक, 2008 पर फिलहाल राज्य सभा की सेलेक्ट कमेटी विचार कर रही है.

यह विधेयक भारतीय बीमा कंपनियों में विदेशी निवेशकों को अपना हिस्सा 49 फीसदी तक ले जाने के इज़ाजत देता है.

सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट इसी शीतकालीन सत्र में आनी है जिसके बाद ही विधेयक को पारित कराने के लिए आगे बढ़ाया जा सकेगा.

कैबिनेट ने पिछले तीन महीनों में दो विधेयकों को मंजूरी दी है. जिनमें एक जहाज़रानी क्षेत्र से संबंधित है तो दूसरा वास्तुकला विद्यालय से.

सदन का काम

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कुछ ऐसे विधेयक भी प्रस्तावित हैं जिनके मसौदों पर अलग-अलग मंत्रालयों में सलाह मशविरे का काम जारी है.

इनमें छोटी फैक्ट्रियों के कामगारों से संबंधित विधेयक है. नागरिकता कानून में भी कुछ संशोधन प्रस्तावित हैं और सड़क परिवहन और सुरक्षा से जुड़ा विधेयक भी है.

शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा के प्रश्नकाल का समय अब पहले की तरह 11 से 12 बजे न होकर दोपहर 12 से एक बजे तक होगा.

इसके साथ ही राज्यसभा का काम भी अब पहले से एक घंटे ज्यादा होगा. यह सुबह 11 से शाम छह बजे तक होगा.

2014 के बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान संसद के कामकाज में हुए सुधार के मद्देनज़र इन बदलावों को देखा जा सकता है.

प्राथमिकता सूची

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बजट सत्र के दौरान लोकसभा ने प्रश्नकाल के दौरान 87 फीसदी काम किया जबकि राज्यसभा नियत समय का 40 फीसदी ही इस्तेमाल कर पाई.

2011 में भी राज्यसभा ने इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की थी जब प्रश्नकाल का समय खिसकाकर दो बजे से तीन बजे के बीच कर दिया गया था लेकिन इसे कुछ समय बाद ही रोक दिया गया.

हालांकि संसद के इस शीतकालीन सत्र में कौन से विधेयक सरकार की प्राथमिकता सूची में है, इस पर आधिकारिक रूप से अभी तक कुछ नहीं कहा गया है.

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