झारखंड: संगीनों के साए में मतदान

इमेज कॉपीरइट pti

झारखंड में मंगलवार को विधान सभा चुनाव के पहले चरण का मतदान मुख्य रूप से उन इलाकों में हो रहा है जो सबसे ज़्यादा संवेदनशील माने जाते हैं.

यह वो इलाके हैं जहाँ सुरक्षा बलों और माओवादियों के साथ-साथ उनसे टूटकर अलग हुए धड़ों के बीच संघर्ष चल रहा है.

पहले चरण में सभी राजनीतिक दलों के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है.

विधान सभा की इन 13 सीटों पर सबसे ज़्यादा दल बदल भी देखने को मिला जब कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा के कई नेताओं ने टिकट के लिए अपनी पुरानी पार्टियों को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.

पहले चरण के मतदान वाले इलाकों में माओवादियों ने लोगों से चुनाव का बहिष्कार करने का आह्वान किया है और इसके लिए जगह-जगह संगठन ने पोस्टर और बैनर भी लगाए हैं और पर्चे भी बांटे हैं.

पुख़्ता सुरक्षा व्यवस्था

पहले चरण की 13 सीटों पर मतदान कराना राज्य के प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है और इसलिए इन इलाकों में चालीस हज़ार से ज़्यादा सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात किया गया है.

झारखंड के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि पहले चरण में सबसे ज्यादा अति संवेदनशील इलाका लातेहार ज़िला ही है जहाँ कुछ अरसे से पुलिस ने माओवादी छापामारों के ख़िलाफ़ सघन अभियान चला रखा है.

लातेहार के अलावा गढ़वा, चतरा, विश्रामपुर जैसे क्षेत्र भी काफी संवेदनशील हैं, मगर पुलिस प्रमुख का दावा है कि सुरक्षा के इतने कड़े इंतज़ाम किए गए हैं कि मतदान की प्रक्रिया को बाधित करना माओवादियों के लिए मुश्किल होगा.

इससे पहले गुमला और बिशुनपुर में माओवादियों ने चुनाव प्रचार की गाड़ियों पर हमला किया था.

हालांकि शहरी इलाकों में चुनाव का प्रचार ज़ोर शोर से चलता रहा मगर सुदूर जंगल के इलाकों में न तो प्रत्याशी ही गए और ना ही चुनाव प्रचार के वाहन. माओवादियों ने इन पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा था.

लगभग 23 ऐसे मतदान केंद्र हैं जहाँ मतदानकर्मियों को सड़क मार्ग से भेजना मुश्किल काम है क्योंकि यह सुदूर इलाके हैं इस लिए सोमवार की शाम तक इन केंद्रो पर मतदान कर्मियों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से भेजा गया है.

प्रशासन की चुनौती

सुरक्षा के दृष्टिकोण से रविवार से ही मतदानकर्मियों की तैनाती शुरू कर दी गई थी. बचे हुए मतदानकर्मियों को सोमवार की शाम तक तैनात कर दिया गया है.

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि मतदान के दौरान छह हेली कॉप्टर भी विभिन्न इलाकों में तैनात किए जाएंगे ताकि समय पर उनका इस्तेमाल किया जा सके.

इस चरण में कुल 3961 मतदान केंद्रों में से 2856 मतदान केंद्र या तो संवेदनशील या अति-संवेदनशील घोषित किए जा चुके हैं. केवल 52 ही ऐसे केंद्र हैं जो सामान्य श्रेणी में आते हैं.

इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पहले चरण का मतदान चुनाव आयोग और राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे के लिए कितनी बड़ी चुनौती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार