मोदी सरकार को झुका पाएगा विपक्ष?

इमेज कॉपीरइट AP

संसद का शीतकालीन सत्र एक ऐसे समय में शुरू हुआ है जब केंद्र सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य नज़र आती है जिसके लिए इसे संसद से कई अहम बिल पारित कराने होंगे.

विकास, मोदी सरकार का एक अहम मंत्र है और एक बड़ा चुनावी वादा भी.

विकास के लिए आर्थिक सुधार ज़रूरी है. केंद्रीय सरकार को विश्वास है कि इन बिलों को पारित कराने में वो कामयाब रहेगी.

लेकिन सोमवार को सत्र शुरू होने से कुछ दिन पहले विपक्ष एक नए इरादे के साथ और एकजुट होकर इन बिलों को आसानी से न पारित होने देने के लिए कमर कस चुकी है.

विपक्ष को बीमा बिल और भूमि अधिग्रहण बिल जैसे कई दूसरे बिलों पर आपत्ति है. इन्हें पारित कराने से पहले विपक्ष इन पर सार्वजनिक बहस चाहती है.

पास होंगे 36 विधेयक?

मोदी सरकार इस सत्र में 36 बिल संसद से पारित कराने का इरादा रखती है जिनमें विवादास्पद श्रम बिल, बीमा बिल, भूमि अधिग्रहण बिल और वस्तु एवं सेवा कर बिल ख़ास हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '100 स्मार्ट सिटीज़' की परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए भूमि अधिग्रहण बिल पारित कराना ज़रूरी है.

इसी तरह केंद्रीय सरकार बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने का इरादा रखती है जिसके लिए बीमा बिल पारित कराना ज़रूरी है.

ये अहम बिल मोदी सरकार के लिए संसद में पहली बड़ी चुनौती होंगे. नरेंद्र मोदी ने सांसदों और विपक्ष से साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया है.

उन्होंने सत्र शुरू होने से पहले कहा कि देश को चलाने की ज़िम्मेदारी सभी सांसदों की है.

साथ ही ये सत्र विपक्षी दलों के मज़बूत इरादों का भी कड़ा इम्तिहान होगा. 14 नवंबर को नेहरू जयंती के अवसर पर कांग्रेस और कुछ दूसरी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर काम करने का फैसला किया था.

इसके इलावा 'जनता परिवार' में शामिल पार्टियों यानी राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने संसद में बीजेपी सरकार का डटकर मुक़ाबला करने का निर्णय लिया है.

विरोध का करना होगा सामना

इमेज कॉपीरइट PIB

लोक सभा में बीजेपी सरकार को बहुमत है. इसलिए लोक सभा में इसे कोई दिक्कत नहीं होगी, मगर राज्य सभा में इसको बहुमत हासिल नहीं है.

ऐसे में मोदी सरकार को आम सहमति बनाने के लिए कई तरह की तरकीब इस्तेमाल करनी पड़ सकती है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 10 नवंबर को कहा था कि सरकार शीतकालीन सत्र में बिलों को पारित कराने के लिए आम सहमति बनाने की पूरी कोशिश करेगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो सरकार विपक्ष के विरोध की परवाह नहीं करेगी.

संसद का मौजूदा सत्र छह महीना पुरानी मोदी सरकार के लिए जहाँ एक बड़ी चुनौती है वहीं विपक्ष के संकल्प को परखने का भी एक अहम मौक़ा. ऐसे में आशंका ये है कि ये सत्र हंगामों से भरा होगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार