नसबंदीः कुछ औरतें फिर अस्पताल में भर्ती

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी के बाद बीमार पड़ी जिन महिलाओं को अस्पताल से घर भेज दिया गया था, उनमें से कुछ को फिर से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है.

सोमवार को ही छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि नसबंदी कांड के बाद बीमार महिलाओं में से दो को छोड़ कर सभी महिलाओं को स्वस्थ पाया गया है.

'सब कुछ बिखर गया'

मोछ गांव की रहने वाली इंदिराबाई कश्यप के पति अश्विनी कश्यप बताते हैं कि अस्पताल से जिस दिन उनकी पत्नी को छोड़ा गया था, उसी दिन से तबियत बिगड़नी शुरू हो गई थी.

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वह कहते हैं, "अस्पताल से जब छोड़ा जा रहा था, तब भी उसने पेट में दर्द और बुखार की शिकायत की थी. घर पहुंचने के बाद तबियत और खराब हुई, जिसके बाद दोबारा उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा."

मोहनभाटा के रमेश खूंटे की पत्नी संतोषी को भी फिर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है.

उन्होंने झुंझलाते हुए कहा, "नसबंदी के चक्कर में मैं तबाह हो गया. पत्नी की हालत ऐसी लग रही है कि उसे जीवन भर देख-रेख के लिए एक आदमी की ज़रूरत पड़ेगी. यहां पत्नी फिर से अस्पताल में भर्ती है, मैं सराय में हूं और बच्चे गांव में हैं. सब कुछ बिखर गया है."

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हालांकि ज़िला स्वास्थ्य समिति के कार्यक्रम प्रबंधक उत्कर्ष तिवारी का दावा है कि फिर से भर्ती कराई गई महिलाओं की हालत अभी ठीक है. उन्हें केवल एहतियातन भर्ती कर लिया गया है.

तालाब में दवा

इस बीच पड़ोसी ज़िले बलौदाबाज़ार में एक तालाब से भारी मात्रा में दवाएं मिलने के मामले में प्रशासन अब तक यह नहीं पता कर पाया है कि ये दवाएं तालाब तक कैसे पहुंची.

इसके अलावा बनसांकरा जंगल के रास्ते में भी कम से कम 10 बोरी टैबलेट लावारिस हालत में पाई गई हैं.

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जो दवाएं मिली हैं, उनमें ब्रूफेन, टेग्रीटॉल और डाइक्लोवन प्लस शामिल हैं, जिनका उत्पादन नसबंदी कांड के बाद प्रतिबंधित महावर फार्मा करती रही है.

इस कंपनी के मालिकों सुरेश महावर और सुमीत महावर को नसबंदी कांड के बाद गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है.

बलौदाबाज़ार के कलेक्टर राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा, "इस मामले की फिलहाल जांच कर रहे हैं."

कलेक्टर का कहना था कि प्रतिबंधित कंपनियों की दवाओं के लिए दुकानों की जांच की गई थी, लेकिन कहीं से कोई दवा नहीं मिली थी.

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