कोर्ट के समन को मित्तल की चुनौती

  • 27 नवंबर 2014
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भारती सेलुलर लिमिटेड के सीएमडी सुनील भारती मित्तल ने 2जी मामले में समन जारी करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनके साथ एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुइया ने भी इस फ़ैसले को चुनौती दी है.

दोनों ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें 2002 के एनडीए शासनकाल के दौरान अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें अभियुक्त के रूप में समन जारी किया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मित्तल और रुइया के नाम सीबीआई की चार्जशीट में बतौर अभियुक्त शामिल नहीं थे लेकिन 19 मार्च को विशेष सीबीआई अदालत ने यह कहते हुए दोनों को समन जारी किया कि उन दोनों के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए 'पर्याप्त सामग्री' है.

'एक अनोखा मामला'

इसके अलावा सीबीआई अदालत ने हचिसन मैक्स लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक असीम घोष को भी समन जारी किया था. उनका नाम भी चार्जशीट में नहीं था.

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वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मित्तल और रुइया की ओर से मामले की पैरवी करते हुए इसे "एक अनोखा मामला" बताया.

इस मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.

सीबीआई की चार्जशीट में पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष और तीन दूरसंचार कंपनियों, भारती सेलुलर लिमिटेड, हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (जो अब वोडाफ़ोन इंडिया लिमिटेड है) और स्टर्लिंग सेलुलर लिमिटेड (अब वोडाफ़ोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड) के नाम थे.

बाद में सीबीआई ने मित्तल, रुइया और असीम घोष को यह कहते हुए समन जारी किए कि 'प्रथम दृष्टया' वे ही अपनी कंपनियों में 'काम की देखरेख कर रहे थे'.

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