मोदी राज पर बुकलेट, कांग्रेस का वार

  • 2 दिसंबर 2014
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हालांकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री वेंकया नायडू ने कांग्रेस के आरोप पत्र को ख़ुद को सांत्वना देने वाला क़दम बताकर इसे टालने की कोशिश की है लेकिन इस तरह की रिपोर्टें भारतीय जनता पार्टी के लिए लंबे समय में मुश्किलें पैदा कर सकती हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार डक्कन हेरल्ड के राजनीतिक संपादक शेखर अय्यर का कहना है कि ये आरोप पत्र साबित करता है कि कांग्रेस अपनी विपक्ष की भूमिका को सीरियसली ले रही है.

वो कहते हैं, “दस लंबे सालों तक सत्ता से बाहर रहने वाली बीजेपी को ये समझ में आने लगा है कि विपक्ष के तौर पर किए गए विरोधों और सरकार में रहकर उन्हें लागू करने में बहुत बड़ा अंतर है.“

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक एनडी शर्मा का कहना है कि बीजेपी कांग्रेस की किन पालिसियों का नक़ल कर रही है या नहीं ये लोगों पर बहुत असर नहीं डालेगी.

वो कहते हैं कि कांग्रेस को लोगों को मंहगाई में राहत न मिल पाने और सुरक्षा व्यवस्था की पहले जैसी बदतर हालात को उजागर करने की तरफ़ ज़्यादा ध्यान देना चाहिए.

‘छह महीने पार, यू टर्न सरकार’

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कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली में ‘छह महीने पार, यू टर्न सरकार’ की शीर्षक वाला एक बुकलेट जारी किया जिसमें वो कथित 25 यू-टर्न गिनाए हैं जिनपर भारतीय जनता पार्टी ने कहा कुछ और था और सरकार में आने के बाद किया कुछ और.

इसमें ज़िक्र है काला धन भारत वापस लाने की बीजेपी के वायदे की, सुभाष चंद्र बोस के लापता होने और इससे जुड़ी 39 फ़ाइलें सार्वजनिक करने की बात जिसे बीजेपी ने कहा था कि वो करेगी, और इसी तरह की दूसरी बातों का.

कभी काला धन विदेश से लाकर हर नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रूपये डालने का वादा करने वाली बीजेपी की सरकार अब कह रही है कि काला धन विदेश से लाना उतना आसान नहीं होगा.

कुछ उसी तरह की बात जो कांग्रेस के वित्त मंत्री कहा करते थे.

एनडी शर्मा कहते हैं कि काला धन मामले में लोगों को फ़र्क सिर्फ इसलिए पड़ेगा क्योंकि बीजेपी ने लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर का वादा कर दिया था.

अब आधार पहले निराधार

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अजय माकन का कहना था कि पार्टी ने इस बुलकेट को छापने के लिए शुक्रवार को जब प्रेस भेजा और सोमवार, जब इसे जारी किया गया के बीच मोदी सरकार ने तीन ऐसे फैसले किए हैं जो उसके चुनाव के समय या उससे पहले लिए गए रूख़ के बिल्कुल उलट हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को असम में बांग्लादेश के साथ भूमि लेन-देन समझौता करने की बात कही है. जबकि कभी अरुण जेटली ने यूपीए सरकार को पत्र लिखकर इसे 'देशद्रोह' की संज्ञा दी थी.

दोनों मुल्कों के बीच ये समझौता पिछली सरकार के वक्त किया गया था.

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शेखर अय्यर मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लागू की गई आधार स्कीम का उदाहरण देते हैं.

पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर स्कीम की ये कहते हुए खिल्ली उड़ाई थी कि मनमोहन सिंह सरकार सुप्रीम कोर्ट इसकी ज़रूरत को लेकर नहीं समझा पाई है. इसलिए ये स्कीम फेल हो गई है.

बीजेपी के कुछ नेताओं ने तो इसे निराधार स्कीम क़रार दे दिया था.

‘कांग्रेस की तरह न खो दें भरोसा’

लेकिन अब ख़बरों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी ने यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथरिटी ऑफ इंडिया से कहा है कि जून 2015 तक सभी को आधार कार्ड दे दिए जाने चाहिए.

पार्टी के एक नेता ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा कि हमें डर है कि कहीं लोगों का भरोसा हमपर से कुछ उसी तरह से न उठ जाए जिसका शिकार कभी कांग्रेस पार्टी हुई थी.

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हालांकि कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि अभी वो वक्त आने में देर है लेकिन वो सरकार के पलटते रूख़ को लेकर चिंतित ज़रूर हैं वो भी तब जब लोग गली मुहल्ले में उनसे किए गए वादों को लेकर सवाल करते हैं.

हालात कुछ इस तरह के हो रहे हैं कि कम बोलने वाले मनमोहन सिंह ने दो दिनों पहले केरल में ये कहते हुए बयान दिया कि मोदी का स्वच्छ भारत अभियान यूपीए सरकार की निर्मल भारत अभियान का बदला हुआ नाम है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि गुलाब को किसी भी नाम से बुलाओ वो रहता तो गुलाब ही है.

'लोगों से जुड़ा मुद्दा उठाना होगा'

एनडी शर्मा कहते हैं कि जनता की सुरक्षा के मुद्दे को – चाहे वो पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी हो या छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले कांग्रेस अगर उठाएगी तो उसे अधिक फ़ायदा होगा.

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शेखर अय्यर के मुताबिक इस पूरी बहस में एक बात ये भी निकलकर सामने आ रही है कि क्या किसी पालिसी या फ़ैसले का विरोध सिर्फ इसलिए किया जाना चाहिए क्योंकि एक पार्टी विपक्ष में है और दूसरी सत्ता में या यहां पर देशहित को पहले रखे जाने की जरूरत है.

लेकिन साथ ही वो ये भी चेतावनी देते हैं कि हो सकता है कि खुद कांग्रेस को भी कुछ सवालों को जवाब देने हों.

जैसे कि वो खुद इन सभी नीतियों को लागू करवाने के लिए कितनी गंभीर थी क्योंकि उसके भीतर भी बहुत सारी नीतियों और फैसलों को लेकर भारी मतभेद थे.

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