सीएम का स्कूल: दलित के बनाए खाने को 'ना..'

मैसूर सिद्धारमैया का स्कूल इमेज कॉपीरइट Ravi

मैसूर के कुपेगाला स्कूल में कई अभिभावकों ने बच्चों को मिड डे मील में मिलने वाला खाना खाने से मना कर दिया है क्योंकि उसे एक दलित रसोइया बनाता है.

यह न सिर्फ़ मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है बल्कि वही स्कूल है जहां कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पढ़े हैं.

सोमवार को कथित रूप से अभिभावक जबरदस्ती स्कूल में घुस आए और अपने बच्चों को मिड डे मील खाने से रोक दिया.

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उन्होंने बाहर से खाना लाकर अपने बच्चों को खिलाया. स्कूल के 133 बच्चों में से 48 ने घर से लाया खाना खाया.

'तबादला नहीं'

यह ऐसा दूसरा मामला है जब समाज में प्रभावशाली जाति समूह वोक्कालिगा के अनेक अभिभावकों ने बच्चों को वो खाना खाने से रोका जिसे बनाने वाले रसोइयों के दल में कोई दलित तबके का भी है.

स्कूल के प्रधानाध्यापक, चिक्कादेव, ने गांव में जाकर अभिभावकों को यह समझाने की कोशिश की कि वह बच्चों को स्कूल भेजना बंद न करें.

सोमवार को ये अभिभावक फिर से स्कूल में उपद्रव मचाने पहुंच गए.

सार्वजनिक शिक्षा के राज्य उपायुक्त, मोहम्मद मोहसिन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "दलित रसोइए के तबादले का सवाल ही पैदा नहीं होता. उनकी नियुक्ति सूची के अनुरूप हुई है. मिड डे मील के इस मामले को हमारे उपायुक्त और कार्यकारी अधिकारी सुलझा लेंगे."

मोहसिन ने कहा, "राज्य में मिड-डे मील का प्रबंध करने वाले 1.14 लाख लोगों में से करीब 30 फ़ीसदी दलित या पिछड़ी जातियों के हैं. हम इस मुद्दे का हल लोगों को समझाकर निकाल लेंगे."

वरुण विधानसभा क्षेत्र का दौरा करने से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पत्रकारों से कहा कि वह 'इस मामले से जुड़े सभी लोगों से बात करेंगे और मामले का हल निकालेंगे.'

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