अमरीका के 'रिचर्ड वर्मा' जी की चुनौतियां और भारत

  • 10 दिसंबर 2014
रिचर्ड वर्मा भारत में अमरीकी राजदूत इमेज कॉपीरइट US STATE DEPARTMENT

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिचर्ड वर्मा को भारत में नया अमरीकी राजदूत बनाया है.

भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक रिचर्ड वर्मा भारत के राजदूत बनने वाले पहले भारतीय-अमरीकी होंगे.

कुछ महीनों पहले अमरीकी कांग्रेस के सदस्य ने एक सुनवाई के दौरान दो भारतीय मूल के अमरीकी अधिकारियों को ग़लती से भारत सरकार का प्रतिनिधि समझकर उनसे उसी अंदाज़ में सवाल जवाब किए थे.

उनमें से एक थीं दक्षिण एशिया मामलों की उप विदेश मंत्री निशा बिस्वाल और दूसरे थे वाणिज्य विभाग के अरूण कुमार.

संबंधों में नई ऊर्जा

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इस छब्बीस जनवरी को जब राष्ट्रपति ओबामा इंडिया गेट पर परेड देख रहे होंगे, तो एक बार फिर से किसी और से उसी तरह की भूल हो जाने की संभावना है.

पहली वजह ये कि उनके साथ ज़ाहिर है निशा बिस्वाल तो होंगी ही, एक और भारतीय मूल का अमरीकी चेहरा भी उनके साथ होगा--रिचर्ड राहुल वर्मा.

अमरीका ने पहली बार एक भारतीय मूल के अमरीकी को भारत का राजदूत नियुक्त कर दिया है.

मंगलवार की शाम अमरीकी सेनेट ने ध्वनि मत से रिचर्ड वर्मा के नाम को मंज़ूरी दे दी जो भारत-अमरीका के ताज़ातरीन गर्म हुए रिश्तों को देखते हुए एक महज़ औपचारिकता ही थी.

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नियुक्ति से पहले सेनेट में हुए सवाल जवाब के दौरान रिचर्ड वर्मा ने कहा था, "इसमें कोई शक नहीं है कि भारत-अमरीका रिश्तों में एक नई उर्जा आ गई है और एक नया उत्साह भर गया है इसे नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए."

बहुमुखी प्रतिभा

रिचर्ड वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के अमरीका दौरे का हवाला देते हुए कहा कि वो एक बेहद कामयाब दौरा था.

उनका कहना था, "जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि इस रिश्ते की सही शक्ति और क्षमता इस बात में है कि जब सबसे पुराना और सबसे बड़ा लोकतंत्र साथ आएगा तो पूरी दुनिया का भला होगा."

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रिचर्ड वर्मा की नियुक्ति की सुनवाई के दौरान उनके पिता डॉ कमल वर्मा भी वहां मौजूद थे.

उनका ज़िक्र करते हुए रिचर्ड वर्मा ने कहा था, "मेरे माता-पिता पचास साले भारत, जिसे वो बेहद प्यार करते थे, छोड़कर यहां आए और इस देश को अपना लिया. उनकी कड़ी मेहनत और कुर्बानियों की वजह से मैं आज यहां हूं."

रिचर्ड वर्मा अमरीकी वायु सेना में काम कर चुके हैं, सेनेट में बहुमत के नेता हैरी रीड के सलाहकर रह चुके हैं और विदेश विभाग में हिलेरी क्लिंटन के भी साथ काम कर चुके हैं.

भारत पर दांव

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Image caption गुजरात दंगों के कारण मोदी के अमरीका जाने पर दस साल तक प्रतिबंध रहा.

जहां भारत में इस नियुक्ति से शायद इस बात की खुशी हो कि एक भारतीय मूल का व्यक्ति इस मुकाम तक पहुंचा है, वहीं अमरीका में दोनों देशों के रिश्तों को तटस्थ रूप से देखने वालों का कहना है कि इस नियुक्ति से ओबामा प्रशासन ने पिछले तीन चार सालों की ठंडक को काफ़ी कम कर दिया है.

ऐलेन क्रोनस्टैड ने कुछ हफ़्ते पहले कहा था, "आप बस इतना समझ लीजिए कि अमरीका ने अब भारत पर दांव लगा दिया है. उतार-चढ़ाव आते रहते हैं लेकिन इस रिश्ते की बुनियाद अब ठोस है."

वे कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की वरिष्ठ दक्षिण एशिया विशेषज्ञ हैं.

कड़ी चुनौतियां

लेकिन साथ ही अमरीका और भारत के बीच इस वक्त कई पेचीदे मामले भी हैं जिनका सामना रिचर्ड वर्मा को जल्द ही करना होगा.

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इनमें से एक है भारत-अमरीका परमाणु संधि जो भारत के घरेलू क़ानून की वजह से अटका पड़ा है.

वहीं अमरीकी दवा उद्योग की तरफ़ से भी भारत पर ख़ासा दबाव डाला जा रहा है कि वो अपने पेटेंट क़ानून और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स क़ानून में संशोधन करे.

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