एनसी और पीडीपी के लिए बहुत कुछ दांव पर

रविवार को भारत प्रशासित कश्मीर की जिन 18 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा, उसमें सत्तारूढ़ दल नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है.

हालांकि घाटी में एनसी के ख़िलाफ़ बहुत सारी आवाज़ें सुनने को मिलती हैं. ख़ासकर श्रीनगर शहर में, जो एनसी का मज़बूत इलाक़ा रहा है.

कुछ क्षेत्र जैसे पुराने शहर में चुनाव बहिष्कार का असर मतदान पर पड़ सकता है.

घाटी के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. शहरी और ग्रामीण इलाक़ों के अलावा जो 1890 पालिंग बूथ तैयार हुए हैं, उन पर कड़े सुरक्षा प्रबंध होंगे.

बेहतर मतदान प्रतिशत

इस बार जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत पहले की अपेक्षा काफ़ी बेहतर रहा है.

अब तक हुए चुनाव के तीन चरणों 71, 71 और 58 फ़ीसद वोट पड़े हैं. इस बढ़े हुए वोट प्रतिशत की समीक्षा अलग-अलग तरीक़े से की जा रही है.

दूसरी तरफ़ दक्षिणी कश्मीर के जिन दो ज़िलों, अनंतनाग और शोपियां, में मतदान हो रहा है, वहां की आठ में से दो को छोड़कर सभी पीडीपी के क़ब्ज़े में हैं.

18 में से दो सीटें सांबा में हैं जो जम्मू का क्षेत्र है.

भाजपा की दावेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी इस बार सूबे में ख़ुद अपने बलबूते सरकार बनाने का दावा कर रही है.

पूर्व अलगाववादी सज्जाद लोन से भी भाजपा के क़रीब होते रिश्ते की बात कई जगह होती रही है. उधर, पूर्व एनसी और कांग्रेस नेता शफ़ी भट की बेटी हिना भट की भी ख़ूब चर्चा में रही है.

कुछ लोगों ने उन्हें भाजपा का कश्मीर में मुसलमान चेहरा क़रार दिया है. उनके क्षेत्र अमीरकदल में भी वोट डाले जा रहे हैं.

लेकिन भाजपा के एक और उम्मीदवार मोती कौल को लेकर उसके मुक़ाबले कम बात हुई है. हब्बाकदल के वोटर उनकी क़िस्मत का भी फ़ैसला करेंगे.

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