विकसित गांव को ही विकसित करने की तैयारी ?

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भारत के पिछड़े गांवों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की है. इसमें सांसदों से हर साल एक गांव गोद लेकर उसका विकास सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है.

लेकिन कई जगह पिछड़े की जगह विकसित गांव को ही गोद लेने की होड़ लग गई है. बिहार में भी कुछ ऐसे गावों को गोद लिया गया है. बीबीसी की पड़ताल.

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काराकाट संसदीय क्षेत्र का अमियावर गांव- ये राजधानी पटना से करीब 160- 170 किलोमीटर दक्षिण में स्टेट हाईवे- 15 के दोनों ओर स्थित करीब दस हज़ार लोगों का गांव है. इसके कई छात्र आईआईटी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज से पासआउट हैं और देश-विदेश में बतौर आईटी प्रोफेशनल काम कर रहे हैं.

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Image caption काराकाट संसदीय क्षेत्र का विकसित गांव है अमियावर.

गांव की गलियां- घर रोशन हैं. सड़क और मकान पक्के हैं. सोलर लाइट भी लगी है. यहां प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, बैंक आदि भी हैं.

ज़ाहिर है गांव विकास की मुख्यधारा में तेज़ी से बह रहा है लेकिन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने इस गांव को काफ़ी पिछड़ा मान कर गोद लिया है.

हाईटेक है गांव

महानगर पुणे में एमसीए कर निजी कंपनी में सेवा दे रहे गांव के इमरान अंसारी बताते हैं कि यहां की 90 प्रतिशत आबादी इंटरनेट से जुड़ी है.

यहां के युवा निंबस, स्काईप, व्हाट्सएप और नेट का इस्तेमाल भी करते हैं.

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आयुर्वेदिक चिकित्सक ओम प्रकाश पाण्डेय और किसान राजन कुमार सिंह बताते हैं कि उनके कुछ निकट संबधी आईआईटी से पास कर अमरीका में नौकरी कर रहे हैं. कुछ ब्रिटेन में भी हैं, तो 50 से अधिक फिलहाल पुणे- दिल्ली आदि मेट्रो शहरों में है.

दूसरे गांव के साथ नाइंसाफ़ी

मंत्री कुशवाहा के चयन का समर्थन करते हुए गांव के मुखिया सुनील कुमार सिंह कहते हैं कि गांव के कई युवा भले ही अच्छी तालीम पाकर आईटी प्रोफेशनल हो गए हैं लेकिन आम छात्र- छात्राओं के लिए अब भी कॉलेज करीब 25 किलोमीटर दूर है. गांव में कॉलेज और स्टेडियम नहीं हैं.

यह भी कि यहां दो चिमनी भट्टा और एक चावल की मिल है.

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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रवि शर्मा मुखिया की राय से सहमत नहीं लगे.

रवि शर्मा कहते हैं, "इस योजना के तहत पांच से साढ़े पांच हज़ार आबादी वाले गांव को ही जोड़ना था, जबकि इस गांव की आबादी मानक से दोगुनी है. अमियावर पिछड़ा नहीं, बल्कि सुखी- संपन्न हाईटेक गांव है. सांसद महोदय ने इस गांव का चयन कर शॉर्टकट अपनाया है और पिछड़े गावों के साथ नाइंसाफी की है."

इलाके में कई ऐसे गांव हैं, जहाँ लोगों को मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए भी पांच किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है.

मंत्री महोदय का दावा

सामाजिक कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय बताते हैं कि नवादा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने खनवा जैसे सम्पन्न गांव को गोद लिया है. इस गांव में तो डेढ़ अरब की विकास योजना चल रही है.

दूसरा नाम भाजपा के राज्य सभा सांसद आरके सिन्हा का है जिन्होने मैनपुरा गांव को गोद लिया है जो, पटना शहरी क्षेत्र में पड़ता है.

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बेगूसराय के भाजपा सांसद भोला प्रसाद सिंह ने राष्ट्रकवि दिनकर के गांव सिमरिया को गोद लिया है. इसे 1983 में ही आदर्श गांव घोषित किया जा चुका है.

अमियावर गांव के चयन के बारे में कुशवाहा कहते हैं कि वहां गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले और दलित लोगों की संख्या एवं आधारभूत संरचना के अभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा, "यहां विकास के कई काम करने बाकी हैं. बिहार में शायद ही ऐसा कोई गांव होगा, जिसे विकसित कहा जा सके."

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