मराठवाड़ा: हज़ारों गांव में टैंकर से चलता जीवन

  • 20 दिसंबर 2014
इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

किसी गांव देहात में टैंकर से पानी ले जाते हुए और वह भी जाड़े के दिनों में काफ़ी अटपटा सा लगता है. लेकिन मराठवाड़ा के हज़ारों गांवों में यह आजकल आम बात है.

खेती के लिए पानी की आस छोड़ चुके लोग पीने के लिए भी बाहर से पानी मंगाते हैं.

बारिश न होने की वजह से पिछले वर्षों में यहां भूजल का प्रयोग काफ़ी बढ़ गया था. अब हाल यह है कि मराठवाड़ा इलाक़े में लगभग सभी गांवों में पानी का स्तर गिर चुका है.

महाराष्ट्र ग्राउंडवाटर सर्वे एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक़ मराठवाड़ा के 200 गांव रेगिस्तान बनने की कगार पर हैं.

(पढ़ें विस्तार से- पानी के लिए महाभारत की ओर बढ़ता भारत)

केवल गंगापुर तहसील के 55 गांवों में ही शत प्रतिशत भूजल निकाला जा चुका है. लातूर और बीड़ ज़िलों के कई गांवों में अधिकारियों ने ज़मीन से पानी निकालने पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया है.

रेगिस्तान बनने की ओर

इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

मराठवाड़ा क्षेत्र का सबसे बड़ा बांध जायकवाडी पैठण तहसील में है.

इसी तहसील के हर्षी गांव में रहने वाले श्रीधर घायाल ने कहा, “मेरा कुंआ 15-20 साल पुराना है. लगभग 100 मीटर गहरे जाने के बाद अब बस घुटनों तक पानी बचा है. इसके कारण मैंने ड्राप इरिगेशन की प्रणाली भी निकाल दी. जब पानी ही नहीं है तो इसका क्या फ़ायदा. मैंने अपने ढ़ाई एकड़ खेत में कपास और बाजरा बोया था लेकिन दोनों फ़सलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं.”

इस गांव में कुछ लोग टैंकर से पानी लाते हैं तो कुछ छोटी गाड़ी में प्लास्टिक की टंकियां भरकर पानी लाते हैं. पिंपलगांव गिते के सरपंच कल्याणराव देहाडे ने बताया, "टैंकर न हो तो औरतों को लगभग एक-दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है."

(पढ़ें विस्तार से- भारत का जल संकट)

इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

हालांकि, औरंगाबाद के ज़िलाधिकारी विक्रम कुमार ने बताया, “ज़िले में औसत 675 मिलीमीटर बारिश होती है जबकि इस वर्ष केवल 408 मिलीमीटर बारिश हुई है. यह बारिश भी फ़सलों के समय पर नहीं हुई, ज़्यादातर तो बेमौसम हुई. ज़िले के 35 गांवों में 46 टैंकर चल रहे हैं.”

टैंकर से आपूर्ति

ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिकतर टैंकर निजी होते हैं तथा गांव के लोग पैसा इकठ्ठा कर टैंकर मंगाते हैं.

अकेले औरंगाबाद में 115 में से 100 गांवों, 17 कस्बों और 28 तांडों (बंजारों की बस्ती) को टैंकर से पानी दिया जा रहा है.

इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

जायकवाडी पानी नियोजन एवं संघर्ष समिति के नेता जयाजीराव सूर्यवंशी कहना है, "मराठवाड़ा क्षेत्र के अधिकांश गांवों को गोदावरी नदी पर बने जायकवाडी के पानी का सहारा है लेकिन बाक़ी गांव सिर्फ़ बारिश पर निर्भर हैं. लगातार तीन साल से बारिश अनियमित होने से किसानों का पूरा अर्थतंत्र बिगड़ चुका है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार