1987 के बाद सबसे ज़्यादा मतदान: चुनाव आयोग

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जम्मू कश्मीर में अंतिम दौर के मतदान के साथ ही राज्य विधानसभा चुनाव के लिए वोट डालने का काम पूरा हो गया है. पांचवें और अंतिम दौर में कुल मिला कर 65 फीसदी मतदान हुआ है.

चुनाव आयोग का कहना है कि पिछले 25 सालों में इस बार जम्मू कश्मीर में सबसे ज़्यादा मतदान हुआ है. चुनाव आयोग ने कहा पूरे राज्य में 1987 के बाद सबसे ज़्यादा मतदान हुआ. आमतौर पर मतदान शांतिपूर्ण रहा.

पांचवें और अंतिम चरण में 20 सीटों पर वोट डाले गए. इनमें जम्मू की 11, राजौरी की चार और कठुआ की पांच सीटें शामिल हैं.

लंबी क़तारें

चुनाव आयोग के अनुसार भारी ठंड होने के बावजूद मतदान केंद्रों पर लंबी लंबी कतारें देखी गईं.

पहाड़ी ज़िले राजौरी की दो और कठुआ ज़िले के पहाड़ी क्षेत्र बनी को छोड़कर सभी सीटों पर हिन्दू मतदाता बहुमत में थे. अंतिम दौर में 213 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. इनके लिए 2366 मतदान केंद्र बनाए गए.

साल 2008 के विधानसभा चुनावों में इन 20 सीटों में भाजपा को 10, कांग्रेस को पांच, नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) को दो, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को एक और निर्दलीयों को दो सीटें मिली थीं.

भाजपा का 44+ यानी 44 से अधिक सीटे जीतने का लक्ष्य मुख्य रूप से इन्हीं 20 सीटों पर निर्भर करता है.

'20 में से 18 सीटें'

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हिन्दू मतदाता बहुल 17 सीटों पर प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का असर नज़र आया है. पूरे राज्य में उन्होंने नौ रैलियां कीं, जिनमें से चार इसी चरण के 20 चुनावी क्षेत्रों में की गईं.

भारतीय जनता पार्टी ने 20 सीटों पर कई स्टार प्रचारकों को कई दिनों तक तैनात रखा जिनमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली, स्मृति ईरानी, नवजोत सिंह सिद्धू और हेमा मालिनी शामिल थे.

भाजपा इन 20 में से 18 सीटें जीतने का दावा कर रही हैं.

इस अंतिम चरण में पांच मंत्रियों की किस्मत दांव पर लगी है जिनमें चार कांग्रेस और एक नेशनल कांफ्रेंस से हैं. कांग्रेस के उपमुख्यमंत्री की छम्ब सीट भी इसमें शामिल है.

'धुआंधार रहा प्रचार'

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कांग्रेस के लिए ग़ुलाम नबी आज़ाद मुख्य प्रचारक बने रहे, जबकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी एक-एक रैली की थी.

एनसी के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने प्रचार के दौरान भाजपा, पीडीपी के साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा, जिसके साथ वह पिछले छह साल से गठबंधन सरकार चला रहे हैं.

अब दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं.

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पीडीपी के मुख्य प्रचारक मुफ़्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ़्ती ने भ्रष्टाचार ख़त्म करने के साथ ही कश्मीर मसले के हल और भारत-पाकिस्तान दोस्ती पर बल दिया.

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