कौन जाए ज़ौक़ पर दिल्ली की गलियाँ छोड़कर

निलोफर सुलेमान के चित्र, दिल्ली पर आधारित इमेज कॉपीरइट BBC World Service

बैंगलुरु की रहने वाली चित्रकार नीलोफर को पुरानी दिल्ली हमेशा से लुभाती रही है. उनके अनुसार पुरानी जीवन शैली आधुनिक शहरों से लुप्त होती जा रही है, और इसीलिए नीलोफर ने पुरानी दिल्ली को अपने चित्रों के ज़रिए अलग अंदाज़ में पेंट किया है.

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'कैपिटल टॉकीज़ ' पेंटिंग में पुरानी दिल्ली की दैनिक गतिविधियों को चित्रित किया है. इसमें भारतीय आम जीवन शैली को अनोखे व रोचक तरीके से अपने कैनवास पर उभारा गया है.

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इंदौर में जन्मीं नीलोफर ने कुछ समय मुंबई में भी गुज़ारा है. इसलिए इन शहरों का जीवन भी जाने-अनजाने उनके चित्रों में झलकता है. उनके चित्र शहर की पुरानी गलियों की कहानी बखूबी बयां करते हैं.

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इन चित्रों में हिन्दू देवी-देवताओं के संकेत से लेकर दुकानों के साइन बोर्ड, होर्डिंग्स, फ़िल्मी पोस्टर सभी मिलकर एक रोचक कहानी का आभास देते हैं.

चित्र में अंडे वाले से लेकर फूल बेचने वाली तक अपनी कहानी कहते नज़र आते हैं.

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लैटिट्यूड28 गैलरी में आयोजित प्रदर्शनी देखते हुए दर्शक को कतई चित्रकार से ये जानने की ज़रूरत महसूस नहीं होती कि चित्र क्या कहना चाह रहा है. चित्र स्वयं ही दर्शक से संवाद स्थापित करते हैं.

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निलोफर ने अपने चित्रों में अतीतमोह की प्रवृत्ति पर व्यंजक टिप्पणी करने की कोशिश की है. चित्रों को ध्यान से देखने पर पुरानी दिल्ली के जीवन के कई पहलू उभरते हैं.

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आज के दौर की भागदौड़ वाली जीवनशैली में हम अपने आस-पास की खूबसूरती को नजरअंदाज करते चले जाते हैं, नीलोफर के चित्रों में दैनिक जीवन की यही खूबसूरती देखने को मिलती है.

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कहते हैं कि कला तभी सफल है जब वो आम लोगों तक अपनी बात पहुंचा सके. इस चित्र में शहर के सांस्कृतिक इतिहास और हिन्दी फ़िल्मों की लोकप्रियता का फ्यूज़न किया गया है. ग़ालिब, बेगम अख़्तर से लेकर मीना कुमारी तक चित्र में देखे जा सकते हैं. और एचएमवी के ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड पर बने कुत्ते को भला कोई संगीत प्रेमी कैसे भूल सकता है.

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मॉल कल्चर के युग में हाट और बाज़ार दम तोड़ते नजर आ रहें हैं, पर यही बाज़ार कभी आम जीवन का हिस्सा थे.

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20 वर्षों से चित्रकारी कर रही कलाकार नीलोफर सुलेमान का कहना है, "जिन लोगों को आप मेरे चित्रों में देखते हैं, वो मेरे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं. फूल वाली, नाई, सब्ज़ी वाला, मिठाई वाला ये आम जीवन के पात्र हैं."

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