जम्मू-कश्मीर, झारखंड में मतगणना

मतगणना

जम्मू-कश्मीर और झारखंड में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना का काम सुबह आठ बजे से शुरु हो गया है.

पिछले 14 सालों में झारखंड में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जबकि जम्मू कश्मीर में लगभग हाशिए पर रही भारतीय जनता पार्टी ने इस बार पूरा ज़ोर लगा दिया था.

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने जब मतगणना के ठीक एक दिन पहले सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाई तो उन्होंने कहा कि वह जनता का शुक्रिया अदा करना चाहते थे.

लेकिन कई लोगों का मानना था कि उन्हें आभास हो गया है कि मुख्यमंत्री के तौर पर यह उनकी आख़िरी प्रेस कांफ्रेंस होगी.

कश्मीर में किसके हाथ लगेगी बाज़ी?

हालांकि राजनीति के कई जानकार कह रहे हैं कि अब्दुल्लाह की नेशनल कांफ्रेंस ख़त्म नहीं होने जा रही है, जिसका कई जगह पर एलान किया जा रहा है.

लेकिन पार्टी को इस बार हुकूमत का मौक़ा शायद न मिले, यह उमर अब्दुल्लाह की बातों से भी साफ़ था.

2014 का जम्मू-कश्मीर का चुनाव कई मायनों में दूसरे पिछले चुनावों से अलग रहा है.

यहां मैं मतदान के ऊंचे फ़ीसद की बात नहीं कर रहा, क्योंकि वह 2008 के मुक़ाबले महज़ चार प्रतिशत के आसपास बढ़ा है.

नरेंद्र मोदी

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लोगों से बातचीत के बीच यह आभास हो जाता है कि भाजपा के चुनावी प्रचार ने सूबे की जनता में जिस तरह का दोफाड़ था, उसे और गहरा कर दिया है.

इसके बावजूद, रिपोर्टों के मुताबिक़, उन्हें घाटी के उन पंडितों का पूरा वोट नहीं मिल सका जिसके बूते वो कश्मीर में नींव खड़ी करना चाहते थे.

साथ ही पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह का धुंआधार प्रचार अपनी पार्टी के लिए किया है और कई इस तरह के बयान दिए हैं, जिसे लेकर लोगों ने सवाल किया कि यह किसी पार्टी के नेता के लिए तो ठीक है, लेकिन वह जम्मू-कश्मीर के भी प्रधानमंत्री हैं और यह उन्हें शोभा नहीं देता.

इन सबके बावजूद उन्हें सीट कितनी मिलती हैं, यह देखना होगा. भाजपा 44 प्लस का नारा लेकर चली थी जिसे बाद में कई जगहों पर और बढ़ाया गया. यहां विधानसभा की 87 सीटें हैं.

पीडीपी

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Image caption पीडीपी के प्रमुख मुफ़्ती मोहम्मद सईद आगे बताए जाते हैं.

कई टीकाकारों के मुताबिक़ जो होने वाली सबसे बड़ी पार्टी बताई जा रही है, वह है पीडीपी.

पूर्व में भारत के गृहमंत्री रह चुके मुफ़्ती मोहम्मद सईद लंबे वक़्त तक जम्मू-कश्मीर में बहुत बड़ा राजनीतिक नाम नहीं थे.

वह अपना चुनाव भी यहां से हार चुके हैं.

जम्मू से स्थानीय पत्रकार बीनू जोशी

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Image caption मोदी सरकार में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह.

मतगणना के मद्देनज़र जम्मू संभाग में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

नतीजों को लेकर राजनीतिक दल और समर्थकों के अलावा आम लोगों में भी बेहद उत्सुकता है.

पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे देखते हुए चुनावी पंडितों का आंकलन है कि विधानसभा के नतीजों में भी भाजपा अपना प्रदर्शन दुहरा सकती है.

रांची से स्थानीय पत्रकार नीरज सिन्हा

झारखंड में मतगणना को शांतिपूर्वक कराने के लिए, खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

हालांकि राजनीतिक दल पूर्ण बहुमत पाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन राज्य गठन के बाद से अब तक किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है.

बहुत कुछ कहता है भारी मतदान

राज्य के 14 सालों के संक्षिप्त इतिहास में नौ मुख्यमंत्री बने, जबकि राष्ट्रपति शासन तीन बार लगा.

झारखंड मुक्ति मोर्चा को छोड़ किसी भी दल ने भावी मुख्यमंत्री के लिए किसी नेता का नाम आगे नहीं किया है.

झामुमो

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झामुमो ने हेमंत सोरेन को अपना मुख्यमंत्री बताया है.

81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में पूर्ण बहुमत के लिए 41 का आंकड़ा जरूरी है.

पांच चरणों में 81 सीटों के लिए हुए चुनाव में कुल 67.46 फ़ीसदी वोट डाले गए.

यही मतदाता कुल 1136 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने वाले हैं.

कुल 1136 उम्मीदवारों में 363 निर्दलीय और 111 महिला उम्मीदवार हैं.

भाजपा झारखंड 72 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सहयोगी दल आजसू पार्टी और लोजपा के लिए नौ सीटें छोड़ी हैं.

झामुमो अपने दम पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस का राजद और जदयू के साथ गठबंधन है.

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