जम्मू-कश्मीर: एक राज्य, दो जनादेश

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जम्मू और कश्मीर में 12वीं विधानसभा के गठन के परिणाम पर नज़र डालें तो लगता है जैसे दो अलग-अलग राज्यों के परिणाम हैं.

राज्य के जम्मू क्षेत्र की 37 सीटों में 25 भाजपा को मिली हैं और बाक़ी 12 दूसरे दलों को.

वैसे ही भारत प्रशासित कश्मीर घाटी की 46 में 30 सीटें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को मिली हैं और 16 अन्य दलों में बंट गई हैं.

सर्द रेगिस्तानी इलाक़े लद्दाख की चार सीटों में तीन कांग्रेस को और एक निर्दलीय को मिली है.

जम्मू में भाजपा

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इससे साफ़ है कि मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी और हिंदू बहुल जम्मू क्षेत्र दोनों की राजनीतिक विचारधारा और आकांक्षाएं अलग हैं.

जम्मू के नतीजे बताते हैं कि हिंदू वोट मोदी लहर के नाम पर एकजुट हो गया है.

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1996 के विधानसभा चुनाव में जम्मू में भाजपा को आठ सीटें मिली थीं जो 2002 के चुनाव में घटकर एक रह गई.

फिर 2008 में अमरनाथ स्थापना बोर्ड के लिए ज़मीन आवंटन को लेकर हुए आंदोलन के बाद चुनाव में भाजपा ने 11 सीटें जीती थीं.

ध्रुवीकरण

इस बार भाजपा की झोली में 25 सीटें आईं, जिनमें जम्मू के केवल हिंदू क्षेत्रों में तो सीटें मिली ही, मुस्लिम बहुल क्षेत्र जैसे किश्तवाड़, डोडा, बनी, भदरवाह जैसी सीटें भी भाजपा के खाते में गईं.

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जम्मू विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर रेखा चौधरी कहती हैं, "इससे यह बात सामने आई है कि जम्मू क्षेत्र में मिली-जुली जनसंख्या वाले इलाक़ों में वोटों का हिंदू लाइन पर ध्रुवीकरण हुआ है."

रेखा चौधरी कहती हैं, "मोदी लहर के नाम पर जम्मू और कश्मीर में हिंदू वोट एकजुट हो गया है."

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Image caption जम्मू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रेखा चौधरी.

रेखा बताती हैं, "पिछले दो साल से लगता था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व में कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली सरकार से लोग खुश नहीं थे."

उन्होंने कहा, "भ्रष्टाचार और कुशासन से नाराज़ लोगों को बदलाव के लिए वोट डालना ही था. मगर ऐसे ध्रुवीकरण की उम्मीद नहीं थी."

सांप्रदायिक तनाव

किश्तवाड़, डोडा और भदरवाह सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील हैं.

पिछले साल ईद पर किश्तवाड़ में हिंदू मुस्लिम दंगे भड़क गए थे, जिसमें चार लोग मारे गए थे और कई ज़ख्मी हो गए थे.

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कई दिनों के कर्फ़्यू के बाद स्थिति काबू में आई थी.

स्वस्थ संकेत!

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Image caption जम्मू कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक मनमोहन खजुरिया.

जम्मू कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक मनमोहन खजुरिया कहते हैं, "इस तरह के चुनाव परिणाम धार्मिक वजहों से हैं."

वे कहते हैं कि इससे स्पष्ट है कि मोदी केवल हिंदुओं के लिए लहर हैं, और यह कोई स्वस्थ संकेत नहीं है. विशेष रूप से जब राज्य अलगाववाद और दहशतगर्दी की पकड़ में है."

उनका मानना है कि राज्य में सेक्युलर ताक़तों को बढ़ावा मिलने से ही राज्य का अस्तित्व और स्वरूप बना रहेगा.

प्रोफ़ेसर रेखा चौधरी कहती हैं, "भाजपा को मिली इतनी सीटों से विधानसभा अस्थिर रहेगी और अगर भाजपा सरकार से बाहर हुई, तो परेशानी विधानसभा में उनकी इतनी संख्या संभालने में होगी."

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