बबुआ, ये है ग्रीन सिटी भभुआ

  • 25 दिसंबर 2014
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जयपुर को पूरी दुनिया में गुलाबी शहर या पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है. जयपुर के नक्शे कदम पर बिहार के भभुआ शहर को पिछले एक साल से अधिक समय से ग्रीन सिटी के रूप में सजाया जा रहा है.

राजधानी पटना से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित भभुआ कैमूर ज़िले का मुख्यालय है.

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कैमूर नगर परिषद ने इस साल 16 जनवरी को इस शहर को ग्रीन सिटी घोषित किया था. कैमूर ज़िला धान का कटोरा भी कहा जाता है.

इस ज़िले के कई इलाक़े इतिहास के पन्नों में भी दर्ज हैं, लेकिन अब इसके मुख्यालय के साथ एक नई पहचान भी जुड़ गई है.

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शहर की ढाई किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क के दोनों तरफ़ की लगभग सभी इमारतें हरे रंग में दिखाई देती हैं.

यह नज़ारा सहज रूप से शहर में आने वाले हर नए शख़्स का ध्यान खींचता है. शहर को यह पहचान मिली है एक नौकरशाह की पहल पर.

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फ़िलहाल राज्य खाद्य निगम के प्रबंध निदेशक की ज़िम्मेवारी संभाल रहे अरविंद कुमार सिंह ने कैमूर के ज़िलाधिकारी रहते इस अभियान की शुरुआत की थी.

अरविंद के अनुसार किसी ज़िले की कमान पहली बार संभालने के बाद उन्होंने कुछ लीक से हटकर करने की सोची. इसके लिए उन्होंने भभुआ को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने की पहल की.

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अरविंद ने 2013 में दीवाली के पहले बैठक कर लोगों से अपने घरों को हरे रंग में रंगने की अपील की थी.

तब न सिर्फ़ मकानों को रंगने का अभियान चला, बल्कि शहर की हरियाली और सफ़ाई पर भी ध्यान दिया गया था.

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भभुआ के बाशिंदे बताते हैं कि जहां एक ओर आम लोगों ने ज़िलाधिकारी की अपील का साथ दिया, तो दूसरी ओर सरकारी आदेश न होने के बावजूद लगभग सारे सरकारी भवन भी हरे रंग के हो गए.

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लोगों का कहना है कि हरा रंग इसलिए चुना गया क्योंकि कैमूर ज़िला अपने हरे खेतों और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है.

भभुआ निवासी अधिवक्ता चंद्रधीश दूबे ने भी अपने घर को हरे रंग में रंगा है. वे बताते हैं कि अब शहर काफ़ी खूबसूरत लगता है.

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हालांकि चंद्रधीश कहते हैं कि ज़िलाधिकारी के बदलते ही यह अभियान धीमा पड़ा है. यह अब तक जन अभियान नहीं बन पाया है.

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नए साल में कैमूर नगर परिषद ने ग्रीन सिटी की पहला सालगिरह आयोजित करने की योजना बनाई है. मक़सद लोगों को इस छोटे से शहर को ख़ास पहचान देने वाली इस अनूठी मुहिम से और मज़बूती से जोड़ना है.

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नगर परिषद की कोशिश है कि मुख्य सड़क के अलावा पूरा शहर भी हरा दिखे और आने वाले दिनों में भी यह मुहिम बरकरार रखी जा सके.

इसके लिए परिषद की ओर से शहर के हर वार्ड के लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आग्रह किया जा रहा है.

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अभियान का असर इसके आसपास के क़स्बों में भी दिख रहा है. ज़िले के दूसरे बड़े क़स्बे मोहनियां में भी कई इमारतें और सरकारी भवन हरे रंग की दिखने लगी हैं.

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