गोडसे मूर्ति विवाद: पुलिस ने केस दर्ज किया

  • 26 दिसंबर 2014
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मेरठ में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाने के लिए हुए भूमि पूजन और आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है.

पुलिस ने अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य मदन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करते हुए रिपोर्ट ज़िलाधिकारी पंकज यादव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ओंकार सिंह को भेज दी है.

महत्वपूर्ण है कि हाल में भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने गोडसे को राष्ट्रभक्त कहा था लेकिन बाद में उन्होंने इस टिप्पणी को वापस ले लिया था.

'देशहित को तवज्जो दी'

मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाक़े में शारदा रोड पर अखिल भारत हिंदू महासभा का दफ़्तर है.

इसकी परिसर में गोडसे की प्रतिमा लगाने के लिए भूमि पूजन हुआ और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. इस दौरान पुलिस भी मौजूद थी.

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आचार्य मदन के मुताबिक़ गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को गोडसे की मूर्ति का अनावरण होगा.

आचार्य मदन का कहना था कि 'नाथूराम गोडसे ने देशहित को तवज्जो दी.' उनका कहना था कि देश को बांटने और ग़लत निर्णय लेने से देशवासी क्षुब्ध थे, जिनमें नाथूराम भी एक थे.

मेरठ ही क्यों?

गोडसे की मूर्ति स्थापना के लिए मेरठ को चुनने के सवाल पर आचार्य मदन का कहना था कि मेरठ क्रांतिधरा और वीरों की धरती है. उन्होंने कहा कि 24 दिसम्‍बर 1941 को नाथूराम गोडसे मेरठ आए थे.

उनके मुताबिक़ गांधी की हत्या में सह अभियुक्त और नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे ने 1989 में यहीं से लोकसभा चुनाव लड़ा था.

हिंदू महासभा ने इस बात को बेबुनियाद बताया कि गोडसे की मूर्ति लगाने से मेरठ में बदअमनी हो सकती है. उनका तर्क है कि मूर्ति लगाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है.

नाथूराम गोडसे की सोच और विचारधारा को लेकर हिंदू महासभा उत्तर प्रदेश में सक्रिय है.

महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश तिवारी ने इससे पहले सीतापुर में गोडसे की याद में मंदिर बनाने की बात कही थी.

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