'घर वापसी' और 'धर्म बचाओ' का मतलब क्या?

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नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 के आखिरी महीनों में धर्मांतरण की ख़बरें मीडिया की सुर्ख़ियों में रहीं.

चुनावी माहौल में लगातार साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाले कई बयान भी सामने आए.

संघ परिवार और विहिप ने उत्तर प्रदेश में जिस ‘लव जिहाद’ आंदोलन की शुरुआत की वो घर-वापसी (धर्म परिवर्तन) के बाद अब ‘बहू लाओ-बेटी बचाओ’ की सुगबुगाहट में बदलता दिख रहा है.

पढ़ें, धर्म परिवर्तन पर बीबीसी की ख़ास सिरीज़

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2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश का साम्प्रदायिक माहौल काफ़ी गर्म रहा.

चुनावों से ठीक पहले मुज़फ़्फ़रनगर में दंगे हुए. इन दंगों के लिए प्रदेश की समाजवादी पार्टी सपा सरकार ने भाजपा को दोषी ठहराया और भाजपा ने सपा को.

जुलाई में मेरठ में एक हिन्दू युवती और मुस्लिम युवक के प्रेम विवाह को भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने लव-जिहाद का मुद्दा बना दिया.

बाद में इस मामले के कई नए पक्ष और बदले हुए बयान सामने आए.

'घर वापसी' के ऐलान

पिछले साल दिसंबर में आगरा में संघ परिवार के 57 मुसलमानों को कथित तौर पर हिन्दू बनाने पर विवाद खड़ा हो गया था.

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इसके बाद अलीगढ़, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर और अन्य शहरों में 'घर वापसी' के कार्यक्रमों के आयोजन की घोषणाएं होने लगीं.

धर्म जागरण मंच के नेता राजेश्वर सिंह ने एक बयान में दावा किया कि 25 दिसंबर को आगरा में ‘घर-वापसी’ का आयोजन होगा.

इस बीच, भागलपुर और मुंगेर के बाद जब बोधगया में 200 महादलितों ने क्रिसमस के दिन ईसाई धर्म स्वीकार किया तब संघ से जुड़े संगठन उन्हें हिन्दू बनाने पर आमादा हो गए.

लेकिन महादलितों ने अपने 'जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा की ख़ातिर 'ईसाई' बने रहने का निर्णय लिया.

धर्मांतरण क़ानून

भारत के पांच राज्यों-ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य-प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में ही फ़िलहाल धर्म-परिवर्तन के ख़िलाफ़ क़ानून है. इस क़ानून के मुताबिक ज़बरदस्ती, धोखे से और लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध है.

आठ दिसंबर 2014 को कथित तौर पर 57 मुसलमानों को हिन्दू बनाने कि घटना को लेकर विपक्ष ने जब सदन में हंगामा किया तो, सरकार का पक्ष ज़ाहिर करते हुए संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने लोक सभा में कहा, "देश के सभी राज्यों में धर्म-परिवर्तन विरोधी क़ानून होना चाहिए. सरकार ऐसा क़ानून लाने के लिए तैयार है."

धार्मिक स्वतंत्रता पर ख़तरा

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विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित कई समूह इस क़ानून के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए ख़तरा मानते हैं.

लेकिन सवाल ये है कि क्या धर्मांतरण और सांम्प्रदायिक रस्साकशी का ये दौर भारतीय समाज के लिए नया है? या फिर धर्मांतरण का मुद्दा भारतीय इतिहास का हिस्सा है जो राजनीति में जब-तब उबाल लाता रहा है.

सवाल ये भी कि क्या घर-वापसी और धर्म-बचाओ का आह्वान मुठ्ठीभर लोगों का दुष्प्रचार है जो सामाजिक-लोकतांत्रिक ताने-बाने को बिगाड़ नहीं सकता?

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इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है, धर्मांतरण पर बीबीसी हिंदी की खास सीरिज़.

पहली कड़ी में आगे पढ़िए कैसे धर्मांतरण के दावों के बीच पहचान के संकट से जूझ रहे हैं छत्तीसगढ़ के आदिवासी.

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