अब ज़रूरी नहीं 'एक्सक्यूज़ मी प्लीज़'

  • 5 जनवरी 2015
भारतीय रेस्तरां

जब आप किसी रेस्तरां में जाते हैं तो अपना भोजन या पेय जल्द से जल्द अपनी मेज पर पाना चाहते हैं.

बिना अपवाद के, प्रबंधक, सुपरवाइज़र या वेटर का ध्यान आकर्षित करने के लिए आपको लगातार अपना हाथ हिलाने या 'एक्सक्यूज़ मी' की गुहार लगाने को मज़बूर होना पड़ता है. और ज़रा सी देर भी झुंझलाहट पैदा करती है.

लेकिन, ऐसा लगता है कि चेन्नई, बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और यहां तक कि कर्नाटक के हुबली जैसे शहरों में अब यह झुंझलाहट धीरे-धीरे बीते ज़माने की बात होती जा रही है.

यह सब संभव हो रहा है इंटरनेट आधारित तकनीकी से.

पढ़ें, लेख विस्तार से

आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले उपकरणों के ज़रिए रेस्तरां अपने ग्राहकों को सहूलियतें दे रहे हैं और इसे अपनी सेवा की विशेषता बना रहे हैं.

थोड़े में कहें तो इस तरह के रेस्तरां में, सेवाएं लेने के लिए ग्राहक को मेज पर रखे एक उपकरण का बटन भर दबाने की ज़रूरत होती है.

यहां तक कि प्रबंधक या वेटर का ध्यान खींचे बिना आप अपना सूप ख़त्म करने से पहले अपनी मेज पर खाना मंगा सकते हैं.

बेंगलुरु या चेन्नई में विकसित की गई इस तकनीक के इस्तेमाल से भारत में रेस्टोरेंट व्यापार का चेहरा बदल रहा है.

तकनीक

इमेज कॉपीरइट IMRAN QURESHI
Image caption कई रेस्तरां में टैबलेट से लिया जाता है भोजन का ऑर्डर.

उदाहरण के लिए चेन्नई के गोपीनाथ जयमालराव की कंपनी स्ट्रोबिलैंथीज़ के उत्पाद 'नूतन' को ही लें.

यह उपकरण नैपकिन रखने वाले छोटे स्टैंड जैसा दिखता है, लेकिन दरअसल, इस पर अलग-अलग रंग के चार बटन लगे हुए हैं. जैसे ही 'ऑर्डर' बटन दबाया जाता है, वेटर की कलाई पर लगी घड़ी से बीप की आवाज़ आती है और उसे पता चल जाता है कि किस मेज से यह 'कॉल' आई है.

गोपीनाथ ने बीबीसी को बताया, "यह उपकरण रेडियो फ्रीक्वेंसी के मार्फ़त 200 मीटर तक सिग्नल भेज सकता है. ऑर्डर लेने के बाद वेटर 'कैंसल' बटन दबाता है. कौन सा समय सबसे व्यस्त रहता है और कौन सी मेज सबसे अधिक कमाई करती है, इसका आंकड़ा भी हम उपलब्ध कराते हैं."

दक्षता बढ़ी

इमेज कॉपीरइट IMRAN QURESHI

इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले आंजप्पर रेस्तरां शृंखला के प्रबंध निदेशक कंडास्वामी आंजप्पन कहते हैं, "इसने हमारी कुशलता को बढ़ाया. इसकी वजह से ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी."

वो बताते हैं, "अब हम जानते हैं कि व्यस्त समय में कितने लोगों को काम पर लगाना चाहिए. असल में, हमने अपने एक बड़े रेस्तरां में कर्मचारियों की संख्या 67 से घटाकर 50 कर दी है. यह हमारे लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ है. इसीलिए हम इसे अपने सभी रेस्तरां में लागू कर रहे हैं."

ग्राहक भी इसे पसंद कर रहे हैं. सैयद ईशान कहते हैं, "यह सकारात्मक और व्यवहारिक है. इसने सेवा को एक क़दम के फ़ासले पर ला दिया है."

यहां तक कि रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाली इस तरह की शुरुआती तकनीक भी फ़ायदेमंद साबित हो रही है.

बेंगलुरु की प्रिज़्मा टेक्नोलॉजीज़ इंडिया की 'प्रिज़्म' तकनीक ने समय को कम किया है और मानव संसाधन की कुशलता को बढ़ाया है.

तकनीक से राह आसान

इमेज कॉपीरइट IMRAN QURESHI

प्रिज़्मा टेक्नोलॉजीज़ के निदेशक जोसेफ़ मैथ्यू कहते हैं, "वेटर अपने छोटे से टैबलेट पर बने दाएं बटन को दबाते हैं. अगर एक मेज पर बैठे ग्राहक भारतीय, चायनीज़ और तंदूरी पकवानों का ऑर्डर देते हैं तो यह उपकरण इन्हें तैयार करने वाले तीन रसोइयों को किचन ऑर्डर टिकट (केओटी) भेज देता है. वेटर मेज पर नज़र रखता है कि ग्राहक अपना सूप कब ख़त्म करते हैं. साथ ही टैबलेट पर एक और बटन मुख्य भोजन के पहुंचने को सुनिश्चित करने के लिए होता है."

एक स्थानीय कंपनी में काम करने वाले जी शिवमूर्ति कहते हैं, "सबसे बढ़िया बात है कि आपको पहला व्यंजन ख़त्म करने के बाद वेटर का इंतज़ार नहीं करना होता."

बेंगलुरु में रेस्तरां शृंखला 'कोणार्क' के निदेशक राममूर्ति कहते हैं, "हम जल्द ही प्रिज़्म से और उन्नत तकनीक लाएंगे, क्योंकि इसने समय बचाने के साथ ही मुनाफ़े को भी बढ़ाया है. हम कुछ कर्मचारियों को कम कर रहे हैं, लेकिन साथ ही नए कर्मचारी भी भर्ती कर रहे हैं, जो हमारे साथ लंबे समय तक बने रहेंगे."

तकनीक से रोज़गार

इमेज कॉपीरइट AP

राममूर्ति बताते हैं, "रेस्तरां व्यवसाय में पहले ऐसा बहुत होता था कि प्रशिक्षित कर्मचारी काम छोड़ देते थे. लेकिन आज हमारे पास ऐसे कर्मचारी हैं जो ऊंची तनख्वाहों पर काम करते हैं. ऐसी तकनीक रोज़गार को और बढ़ावा दे रही है."

हुबली में प्रवीन कुमार 'गोब्बल एंड गो' नाम से एक रेस्तरां चलाते हैं. वो बेंगलुरु की योटो लैब्स का उत्पाद 'पॉज़' इस्तेमाल करते रहे हैं.

वो कहते हैं, "इस तकनीक के इस्तेमाल से हमें अब डेटा के लिए कर्मचारी नहीं रखना पड़ता. यह अपने आप हो जाता है."

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

योटो लैब्स के सीईओ सुबीर साहा कहते हैं, "एक मेहमान को मेज पर एक टैबलेट दिया जा सकता है. वो इसपर क्लिक करके अपना ऑर्डर मंगा सकता है और ज़रूरी हुआ तो इस पर निगरानी भी रख सकता है. अगर भोजन में लहसुन का कम चाहिए तो मेहमान सीधे रसोइए को संदेश दे सकता है."

वो कहते हैं, "भारतीय बाज़ार में जैसे-जैसे बहुराष्ट्रीय फ़ूड श़ृंखलाएं आएंगी, यह तकनीक और विकसित होती जाएगी."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार