'अलजेब्रा, पायथागोरस भारत की देन'

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना है कि बीजगणित और पायथागोरस के सिद्धांत भारत की देन हैं लेकिन इसका श्रेय दूसरे देश ले उड़े.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ हर्षवर्धन ने मुंबई में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में कहा कि प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों ने खुशी-खुशी अपनी खोज का श्रेय दूसरे देशों के वैज्ञानिकों को दे दिया.

उन्होंने कहा, "हमारे वैज्ञानिकों ने पायथागोरस के प्रमेय की खोज की थी लेकिन इसका श्रेय यूनानियों को दे दिया. हम सभी जानते हैं कि अरबों से पहले हमें बीजगणित का ज्ञान था."

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने कभी भी विज्ञान का इस्तेमाल गलत काम के लिए नहीं किया.

प्लास्टिक सर्जन

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा, "चाहे सौर मंडल हो, दवा हो, रसायन या धरती विज्ञान, हमने निस्वार्थ भाव से दुनिया के साथ अपने ज्ञान को बांटा है."

उल्लेखनीय है कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि प्राचीन काल में भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में नए द्वार खोले थे.

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मोदी ने मुंबई में कहा था, "महाभारत में कहा गया है कि कर्ण अपनी मां के गर्भ से पैदा नहीं हुए थे. इसका मतलब है कि तब लोग जेनेटिक साइंस से परिचित थे. किस प्लास्टिक सर्जन ने ही हाथी के सिर को गणेश को लगाया था."

प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा था कि गणितज्ञ आर्यभट्ट ने शताब्दियों पहले जो कुछ कहा था उसे आज दुनिया ने स्वीकार कर लिया है.

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