'जली नाव' और भारत की आशंकाएँ...

  • 6 जनवरी 2015
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Image caption भारतीय तटरक्षकों की तरफ़ से जारी की गई तस्वीर.

भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार 31 दिसंबर को आधी रात के समय उनके एक जहाज़ और एक विमान ने पोरबंदर से 365 किलोमीटर दूर अरब सागर में एक संदिग्ध नाव देखा था.

उनके मुताबिक़, चेतावनी देने के बाद इस नाव में सवार लोग छिप गए थे और नाव में एक धमाके के साथ आग लग गई थी.

इस पर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को कहा कि नाव पर सवार लोग संदिग्ध चरमपंथी थे और तभी उन्होंने नाव को उड़ाकर ख़ुदकुशी की.

उनका कहना था कि अगर वो तस्कर होते तो उन्हें ख़ुद को उड़ाने की क्या ज़रूरत थी. सरकार की तरफ़ से ये पहला साफ़ बयान था.

इससे पहले या तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी या फिर कोस्ट गार्ड जैसी सरकारी एजेंसियां इस मामले में बयान दे रही थीं.

मुंबई हमले की छाया

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भारत में कांग्रेस पार्टी ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं. इसलिए इस विस्फोट को लेकर भारत में राजनीति शुरू हो गई है.

रक्षा मंत्री का बयान कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद आया है.

उधर पाकिस्तान का कहना है कि कराची से कोई नाव भारत की समुद्री सरहदों को पार करके नहीं घुसी है.

सच कुछ भी हो इसकी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी.

भारत सरकार के इस दावे को भारत में लोग गंभीरता से ले सकते हैं. इसका ख़ास कारण ये है कि नवंबर 2008 में इसी तरह की एक नाव पर सवार होकर कराची से दस चरमपंथी मुंबई आए थे.

इन चरमपंथियों ने दक्षिण मुंबई में पांच अलग-अलग जगहों हमले किए थे. इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई.

भारत का डर

मुंबई में हुए हमले में भारतीय सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच तीन दिनों तक मुठभेड़ चली थी. इस मुठभेड़ में नौ चरमपंथी मारे गए और अजमल कसाब नामक चरमपंथी जीवित गिरफ़्तार किया गया था. कसाब को बाद में भारत में फांसी की सज़ा मिली.

भारत में कौन भूल सकता है उस घटना को जो देश आर्थिक राजधानी माने जाने वाले शहर में लगातार तीन दिनों तक जारी रहा और जिसे देश भर में लोगों ने टेलीविज़न पर देखा था.

भारत की सतर्कता और उसका भय समझ में आता है. अभी हाल में मैं मुंबई गया था जहाँ मैं उन मछुवारों से मिला जिनकी बस्ती में नाव पर सवार होकर ये दस पाकिस्तानी बंदूक़धारी उतरे थे.

उनका कहना था कि कोस्ट गार्ड की निगरानी के बावजूद उन्हें इस बात का डर है कि कहीं 2008 की तरह के हमले दोबारा न हो जाएं.

छह साल पहले हुए इन हमलों की याद अब तक ताज़ा है. पाकिस्तान ने पिछले हफ़्ते भारत की समुद्री सीमा के अंदर आने वाली नाव के बारे में कहा कि उसे इसकी जानकारी नहीं है.

हेडली का बयान

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लेकिन मुंबई हमलों ने ये सिद्ध कर दिया है कि पाकिस्तान के अंदर सक्रीय चरमपंथी संगठन भारत में हिंसा करने की क़ाबिलियत रखते हैं. उन्हें पाकिस्तान की सरकार की मदद की ज़रूरत नहीं.

ये और बात है कि मुंबई हमलों की योजना में शामिल और इनमें एक अहम रोल अदा करने वाले डेविड हेडली ने अमरीका की एक अदालत को बताया था कि इन हमलों की तैयारी में पाकिस्तानी फ़ौज की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के दो अफ़सर शामिल थे.

डेविड हेडली ने पूरी योजना का विवरण अदालत को दिया था. शिकागो की इस अदालत में उस समय मैं भी मौजूद था. मैंने मुंबई हमलों पर रिपोर्टिंग की थी और मैं हेडली की मुंबई के बारे में इतनी ज़बरदस्त जानकारी से हैरान था.

सरकार का दावा

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मैं सोच भी नहीं सकता था कि अपनी योजना में वो उस यहूदी केंद्र को शामिल करेंगे जिसे मुंबईवासी भी तलाश करने में समय लगाएंगे क्यूंकि उस इमारत को ढूंढना आसान नहीं है. इस योजना पर दो साल तक काम किया गया था.

पाकिस्तान की सरकार ने उस समय आईएसआई के अफ़सरों के शामिल होने को नकारा था.

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Image caption भारत ज़कीउर्रहमान लखवी को मुंबई हमलों का मास्टर माइंड मानता है.

लेकिन मुंबई हमलों के एक संदिग्ध और पाकिस्तानी जेल में बंद ज़कीउर्रहमान लखवी के ख़िलाफ़ जिस तरह से ढीले तरीक़े से मुक़दमा चल रहा है उससे उसकी नेक नियति पर भारत को शक है.

इस परिपेक्ष्य में अगर भारत सरकार हाल की नाव विस्फोट दुर्घटना को शक की निगाह से देखती है तो इस में कोई हैरानी की बात नहीं. हाँ इसका मतलब ये नहीं कि जो भारत सरकार दावा कर रही है वही सही है.

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