'ममता बताएँ कितना हुआ है निवेश'

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नरेद्र मोदी सरकार बड़े पैमाने पर प्रवासी भारतीय दिवस मना रही है. देश-विदेश से बड़े बड़े उद्योगपति और कारोबारी आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल में ममता सरकार भी ग्लोबल बिज़नेस समिट करवा रही हैं.

राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा का दावा है कि ममता सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य में 83 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है. वहीं प्रदेश में निवेश के लिए माहौल कितना माक़ूल है इस पर भी सवाल उठते रहे हैं.

कोलकाता में चल रहे ग्लोबल बिज़नेस समिट सम्मेलन में ज़ोर तो पूंजी निवेश पर था पर इसमें राजनीति हावी रही. ममता के इस सम्मेलन में केंद्र में भाजपा सरकार के मंत्री अरुण जेटली और नितिन गडकरी भी शामिल हुए.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक मतभेदों को छिपाए बिना एक-दूसरे पर हमले किए और नसीहतें दीं.

जेटली की नसीहत

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जेटली ने जहां ममता को राज्य में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की सलाह दी, वहीं ममता ने साफ़ कहा कि केंद्र के साथ राजनीतिक मतभेदों का पश्चिम बंगाल के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

यह पहला मौक़ा था जब केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद ममता किसी केंद्रीय मंत्री के साथ एक मंच पर मौजूद थीं.

जेटली ने अपने भाषण में ममता पर निशाना साधते हुए कहा, "आपको राज्य पर शासन करने का जनादेश मिला है. इसलिए आप पर अब अपने वादों को पूरा करने और निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की ज़िम्मेदारी है."

उन्होंने कहा कि सब कुछ होने के बावजूद बंगाल से उद्योगों का पलायन हुआ है. वित्त मंत्री ने कहा कि हाल में बना नीति आयोग राज्यों को अपनी बात मज़बूती से रखने में मदद करेगा.

ममता का जवाब

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने भाषण में माना कि केंद्र में सरकार चलाने वाली राजनीति पार्टी के साथ विभिन्न मुद्दों पर उनके मतभेद हैं.

हाल में भूमि अधिग्रहण अधिनियिम में संशोधन समेत विभिन्न मुद्दों पर ममता ने केंद्र के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ रखा है. ममता सरकार ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि सरकार उद्योगों के लिए खेती की ज़मीन का जबरन अधिग्रहण नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि अब निवेश के तमाम प्रस्तावों को सात दिनों के भीतर हरी झंडी मिल जाएगी.

निवेशकों को उम्मीद

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सम्मेलन में पहुंचे निवेशकों को भी राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है. आरपी-संजीव गोयनका समूह के प्रमुख संजीव गोयनका ने कहा, "ममता सरकार राज्य में निवेश आकर्षित करने का हरसंभव प्रयास कर रही है. अब बंगाल के प्रति निवेशकों का रवैया धीरे-धीरे बदल रहा है."

वहीं गोदरेज समूह के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने निवेश और व्यापार का माहौल सुधारने के लिए ममता सरकार की सराहना करते हुए कहा, "राज्य में पिछले तीन महीनों के दौरान उपभोक्ता वस्तुओं की खपत की दर पूर्वी भारत में सबसे तेज़ रही है. यहां अब व्यापार का माहौल पहले के मुक़ाबले सुधरा है."

इस सम्मेलन में राज्य के प्रमुख उद्योगपतियों के अलावा आईटीसी के वाई सी देवेश्वर, यस बैंक के राणा कपूर, एचएसबीसी की नैना लाल क़िदवई, ललित ग्रुप की ज्योत्सना सूरी, पीरामल इंटरप्राइजेज की स्वाति पीरामल, एनटीपीसी अध्यक्ष अरूप राय चौधरी, सेल के अध्यक्ष सी.एस.वर्मा, टीसीएस के सीईओ एन चंद्रशेखर ने भी शिरकत की.

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चेक रिपब्लिक, इसराइल, लक्ज़मबर्ग, अमरीका, इंग्लैंड, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, थाईलैंड और स्पेन के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी इस मौक़े पर मौजूद थे.

विपक्ष की आलोचना

राज्य सरकार भले इस सम्मेलन की सहायता से निवेश के लंबे-चौड़े दावे कर रही हो, विपक्षी राजनीतिक दलों ने इसे राजनीतिक चोंचला क़रार दिया है.

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा कहते हैं, "यह सम्मेलन जनता के पैसों की बर्बादी के सिवा कुछ नहीं है. इससे कोई नया निवेश नहीं आएगा."

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी कहते हैं, "सरकार को पहले एक श्वेतपत्र के जरिए बताना चाहिए कि ममता बनर्जी के सिंगापुर दौरे के बाद यहां कितना विदेशी निवेश हुआ है."

वहीं सीपीएम के प्रदेश सचिव बिमान बसु ने तो इस निवेशक सम्मेलन को सिंगापुर दौरे की तरह ही एक 'पिकनिक' क़रार दिया है.

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