धार्मिक मान्यताएँ और हास्य-व्यंग्य

  • 10 जनवरी 2015
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धर्मों, नेताओं और मान्यताओं का खुला मज़ाक़ उड़ाने वाली फ़्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो के दफ़्तर पर हमला करके चरमपंथियों ने चार कार्टूनिस्टों सहित 12 लोगों की हत्या कर दी.

आख़िर धार्मिक मान्यताओं पर हँसना इतना जोख़िम भरा क्यों है?

धर्म इतना संवेदनशील क्यों बन जाता है? क्या धार्मिक मान्यताओं को हास्य-व्यंग्य से परे रखा जाना चाहिए?

बीबीसी हिंदी रेडियो पर भारतीय समय के मुताबिक़ आज शाम 7:30 बजे इसी विषय पर चर्चा होगी.

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