दिल्ली में बीजेपी ने कितनी ताक़त झोंकी?

  • 13 जनवरी 2015
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सात फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव कराए जाने का फ़ैसला भले सोमवार शाम को हुआ हो लेकिन इसका शंखनाद नरेंद्र मोदी ने शनिवार को रामलीला मैदान में ही कर दिया था.

मोदी ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लगातार निशाने पर रखा, उन्हें ‘अराजक’ बताया और कहा कि ऐसे लोगों को जंगल में जाकर नक्सलियों के साथ रहना चाहिए.

मोदी के केजरीवाल पर सीधे प्रहार से माना जा रहा है कि भाजपा इस विधानसभा चुनाव को सीधे-सीधे मोदी बनाम केजरीवाल बनाने की कोशिश कर रही है.

पार्टी प्रवक्ता नलिन कोहली कहते हैं, “इसमें कुछ ग़लत नहीं क्योंकि मोदी भाजपा के सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता हैं.”

विकास का मॉडल

कोहली के मुताबिक़ मोदी का नाम इसलिए आगे किया जाता है क्योंकि उनके नाम से विकास का मॉडल जुड़ा है जिसे प्रधानमंत्री पूरे देश में लागू करना चाहते हैं.

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हालांकि आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष कहते हैं, “भाजपा के पास कोई बड़ा नेता नहीं है, इसलिए वो अबतक मुख्यमंत्री पद के अपने दावेदार को सामने नहीं ला पाए हैं.”

आशुतोष के मुताबिक मोदी चुनाव को मोदी बनाम केजरीवाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

हालांकि नलिन कोहली के मुताबिक ये पहली बार नहीं है जब पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.

उन्होंने कहा, “पार्टी ने ऐसा ही झारखंड और हरियाणा में भी किया था और दोनों जगह उसे जीत हासिल हुई.”

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अंग्रेज़ी दैनिक 'ट्रिब्यून' के स्थानीय संपादक केवी प्रसाद के मुताबिक़ ये बात ग़लत है कि भाजपा के पास दिल्ली में बड़ा नेता नहीं है और वो पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का नाम लेते हैं जिनकी देखरेख में दिल्ली में लोकसभा का चुनाव पार्टी ने लड़ा था.

'दिल्ली में भाजपा का चेहरा'

केवी प्रसाद दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता जगदीश मुखी का नाम भी लेते हैं. इस बार पार्टी कार्यकर्मों में सतीश उपाध्याय भी आगे दिख रहे हैं.

प्रसाद का कहना है, “भाजपा को मालूम है कि दिल्ली में अगर उसे किसी राजनीतिक दल से ख़तरा है तो वो ‘आप’ है जिसका यहां ख़ासा आधार है.“

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दिल्ली में हुए पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 28 सीटें हासिल की थीं, जबकि पिछले 15 सालों से दिल्ली पर शासन कर रही कांग्रेस आठ सीटों पर पहुंच गई थी.

भाजपा 31 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी लेकिन वो सरकार नहीं बना पाई थी और कांग्रेस के समर्थन से बनी आम आदमी पार्टी की सरकार 49 दिन में गिर गई थी.

चुनाव की तारीख़ के ऐलान के दिन ये ख़बर आ रही है कि कांग्रेस अजय माकन को मैदान में उतार रही है, लेकिन केवी प्रसाद इस चुनाव में कांग्रेस को एक मज़बूत शक्ति के तौर पर नहीं देखते.

'कांग्रेस के पास मुद्दा नहीं'

उनके मुताबिक़ आम आदमी पार्टी की सरकार गिरने के बाद कोई दूसरी सरकार नहीं बनी है इसलिए कांग्रेस के पास कोई बड़ा स्थानीय मुद्दा नहीं है जिसे वो वोटरों के सामने ले जा पाएगी.

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साथ ही केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बने बहुत लंबा समय नहीं हुआ है इसलिए वोटरो के मन में कोई उस तरह की निगेटिव फीलिंग नहीं जिसका कांग्रेस फ़ायदा उठा पाएगी.

कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि दिल्ली के चुनाव को आप मोदी सरकार के कामकाज पर रायशुमारी के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश करेगी और ज़ाहिर है बीजेपी भी इसमें अपनी पूरी ताक़त झोंकेगी.

यह देश की राजधानी की सत्ता का सवाल है और अगर बीजेपी यहां बहुमत हासिल नहीं कर पाई तो भविष्य में उसके लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं.

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