सलमान ख़ान को सुप्रीम कोर्ट का झटका

  • 14 जनवरी 2015
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने काले हिरण के शिकार मामले में सज़ा निलंबित रखने के राजस्थान हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाने के आदेश को ख़ारिज कर दिया है.

निचली अदालत ने 2007 में इस मामले में सलमान ख़ान को पाँच साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

साल 1998 में फ़िल्म 'हम साथ-साथ हैं' की राजस्थान में शूटिंग के दौरान सलमान ख़ान के साथ-साथ सोनाली बेंद्रे, तबू, नीलम, सैफ़ अली ख़ान और अन्य फ़िल्मी अदाकारों पर काले हिरणों के शिकार का आरोप था.

लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के सज़ा के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी.

हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी.

'हाईकोर्ट करे पुनर्विचार'

बुधवार को जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाने के आदेश को ख़ारिज कर दिया और इस मामले को पुनर्विचार के लिए राजस्थान हाईकोर्ट को लौटा दिया.

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Image caption सलमान को निचली कोर्ट ने काले हिरण के शिकार मामले में दोषी करार दिया था

आदेश सुनाते हुए जस्टिस मुखोपाध्याय ने कहा कि सलमान ख़ान कोर्ट को बता सकते हैं कि अगर उनकी सज़ा पर रोक नहीं लगती है तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी और उन्हें सज़ा से छूट दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साथ ही राजस्थान सरकार भी इसके विरोध में दलील पेश कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पांच नवंबर को राजस्थान हाईकोर्ट के फ़ैसले के सज़ा पर रोक के आदेश पर सवाल उठाते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.

सज़ा निलंबित रखने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद सलमान ख़ान के लिए ब्रिटेन के लिए वीज़ा हासिल करने का रास्ता साफ़ हो गया था.

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