ऐसे बच सकते हैं स्वाइन फ्लू से

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भारत में एक बार फिर से स्वाइन फ़्लू सुर्खियों में है. राजधानी दिल्ली में अबतक स्वाइन फ़्लू के 60 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं जिसमें से दस लोगों की मौत भी हुई है.

क्या है स्वाइन फ़्लू

यह सांस से जुड़ी बीमारी है, जो इंफ़्लुएंज़ा टाइप ए से होता है और इससे सूअर भी संक्रमित होते हैं.

इंफ्लुएंजा के कई प्रकार होते हैं और इनका संक्रमण लगातार बदलता रहता है.

स्वाइन फ्लू के शुरुआती मामले 2009 में मैक्सिको में पाए गए थे. तब से अब तक लगभग सौ देशों में इस संक्रमण ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है.

प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों से पता चला कि इस वायरस के जींस उत्तरी अमरीका के सूअरों में पाए जाने वाले जींस जैसे होते हैं, इसलिए इसे स्वाइन फ़्लू कहा जाने लगा.

वैज्ञानिक भाषा में इस वायरस को इंफ़्लुएंज़ा-ए (एच1एन1) कहा जाता है. एच1एन1 की एक अन्य किस्म की वजह से 1918 में महामारी भी फैल चुकी है.

कैसे होता है स्वाइन फ़्लू

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शुरुआत में ये माना जा रहा था कि इसके संक्रमण में सूअरों की भूमिका होती है.

लेकिन बाद में पाया गया कि ये इंसान से इंसान के बीच भी फैलता है, ख़ासकर खांसने और छींकने पर.

आमतौर पर होने वाला जुकाम भी एच1एन1 से ही होता है, लेकिन स्वाइन फ़्लू एच1एन1 की एक खास किस्म से संक्रमित होने से होता है.

स्वाइन फ़्लू के लक्षण क्या हैं?

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इसके लक्षण आम फ़्लू से मिलते जुलते ही हैं, इसलिए इसकी पहचान खून की जाँच से ही संभव है.

वैसे इसके प्रमुख लक्षण हैं- सिर में दर्द, बुखार, गले में खराश, खांसी, बदन में दर्द, सांस लेने में दिक्कत.

इसके गंभीर संक्रमण के कारण शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं, जिसके कारण मौत भी हो सकती है.

क्या इसका इलाज संभव है?

कुछ हद तक इसका इलाज संभव है. इसके मरीज़ों का उपचार टैमीफ़्लू और रेलेन्ज़ा नामक वायरसरोधी दवा से शुरुआती अवस्था में किया जा सकता है.

डॉक्टरों के अनुसार, ये दवा इस फ़्लू को रोक तो नहीं सकती पर इसके ख़तरनाक असर को कम ज़रूर कर सकती है.

इसके बचाव के क्या उपाय हैं?

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स्वाइन प़्लू से बचने का सबसे अच्छा तरीका स्वच्छता के नियमों का पालन करना है.

भीड़-भाड़ वाली जगहों या सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें, खांसते और छींकते वक्त मुंह और नाक को रुमाल या कपड़े से ढंकें.

फ्ल़ू प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें और सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर मास्क लगाएँ.

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