चिम्पांज़ियों के प्रेम के आगे झुका प्रशासन

  • 16 जनवरी 2015
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Image caption लखनऊ के चिड़ियाघर में चिम्पैंजी युगल निकिता और जैसन

बरसों से साथ रह रहे लखनऊ चिड़ियाघर के चिम्पांज़ी निकिता और जैसन को अब अलग नहीं किया जाएगा.

चिड़ियाघर के निदेशक अनुपम गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि चिम्पांज़ी और निकिता को प्रजनन के लिए कानपुर चिड़ियाघर भेजे जाने पर हो रहे विरोध को ध्यान में रखते हुए यह फ़ैसला लिया गया है.

स्वीडन के कोलमार्डेन वाइल्डलाइफ़ पार्क में 1992 में जन्मे ये दोनों चिम्पांज़ी जन्म के तीन-चार साल बाद मैसूर के चिड़ियाघर लाए गए थे.

यहां से साल 2007 में इन्हें लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया.

ऑनलाइन मुहिम

इतने बरस साथ रहने के बाद भी इस युगल के कोई बच्चा ना होने के कारण लखनऊ चिड़ियाघर के अधिकारियों ने निकिता को कानपुर चिड़ियाघर भेजने की योजना बनाई थी.

कानपुर चिड़ियाघर में पहले से रह रहे चिम्पांज़ी छज्जू के साथ निकिता को रखने के पीछे मक़सद ये था कि उनका साथ कुछ सुखद परिणाम दे सके.

लेकिन निकिता को कानपुर चिड़ियाघर में पहले से रह रहे चिम्पांज़ी छज्जू के साथ निकिता को रखने की योजना सामने आते ही इसके खिलाफ ऑनलाइन मुहिम छेड़ दी गई.

न्यूजर्सी के क्रिस वोल्वेर्तोन द्वारा उठाए गए विरोध के स्वर को दुनिया भर के लगभग 20000 से अधिक लोगों ने अपना समर्थन दिया है.

गहरा सदमा

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Image caption विरोधियों का कहना है कि अलग करने से जैसन की सदमे से मौत भी हो सकती है.

निकिता को जैसन से अलग करने का विरोध करने वालों का कहना है कि इतने वर्षों साथ के बाद दोनों को अलग करने से जैसन को गहरा सदमा लग सकता है जिससे उसकी मौत भी हो सकती है.

एनिमल वेलफेयर बोर्ड की को-ओप्टेड सदस्य कामना पांडे ने बताया, "चिम्पांज़ी समूह में रहने वाला प्राणी है. निकिता और जैसन ने पिछले 20 वर्षों में किसी तीसरे चिम्पांज़ी को नहीं देखा. ऐसे में निकिता को कानपुर चिड़ियाघर भेजने से जैसन को इमोशनल ट्रॉमा होने की पूरी संभावना है."

कामना पांडे ने कहा कि ट्रॉमा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि जैसन निकिता को बहुत प्यार से रखता है.

उन्होंने बताया, "जैसन खाना पहले निकिता को खाने देता है फिर खुद खाता है."

बददिमाग छज्जू

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कामना बताती हैं कि उनकी जानकारी के मुताबिक जैसन और निकिता लखनऊ चिड़ियाघर के ऐसे युगल हैं जो आपस में सबसे ज़्यादा प्रेमभाव रखता है.

कानपुर चिड़ियाघर के छज्जू के बारे में कामना पांडे का कहना है कि अकेले रहने की वजह से वो काफ़ी बददिमाग हो गया है.

उन्होंने कहा, "एक बार वो हमारे ऊपर भी पत्थर फेंक चुका है. ऐसे में निकिता के प्रति उसका व्यवहार कैसा होगा इसको जाने बगैर निकिता को वहाँ भेजना गलत होगा. बेहतर तो ये होता कि छज्जू को कुछ दिनों के लिए लखनऊ लाया जाता और तीनों को आस-पास रखा जाता ताकि उनके व्यवहार का अंदाज़ा लगाया जा सके."

कामना पांडे ने कहा कि वो कैदी बनाने के लिए जानवरों के प्रजनन नीति के खिलाफ हैं.

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