कैसे होता है वेबकैमरे और कीबोर्ड से डाटा चोरी?

  • 22 जनवरी 2015
साइबर क्राइम, हैकिंग इमेज कॉपीरइट

जितनी तेज़ी से दुनिया में साइबर क्रांति आई है, उतनी ही तेज़ी से साइबर क्राइम में भी क्रांति आई है.

हाल ही में बॉलीवुड के कुछ जाने-माने निर्माता-निर्देशक और बड़े स्टार भी इसका शिकार हुए.

अनुराग कश्यप की फ़िल्म 'अगली' रिलीज़ होने के एक दिन पहले ही इंटरनेट पर लीक हो गई और इसका प्रिंट मिनटों में भारत से बाहर मौजूद वेबसाइट्स के सर्वर पर चला गया.

साइबर क्राइम और भारत में इसके बढ़ते मामलों पर बीबीसी हिंदी संवाददाता सुशांत मोहन ने बात की दुनिया में साइबर सिक्योरिटी की अग्रणी एजेंसी 'सीसा' के बिज़नेस हेड नितिन भटनागर से.

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नितिन हाल ही में भारत सरकार को भी उनके मंत्रालयों की वेबसाइट्स को हैकिंग प्रूफ़ बनाने पर सलाह दे चुके हैं.

कई प्रकार

जिस तरह किसी अपराध को अलग-अलग श्रेणी जैसे लूट, डकैती, चोरी में बांटा जा सकता है उसी तरह साइबर क्राइम के भी अलग अलग प्रकार होते हैं.

साइबर अपराधों में फिशिंग जिसमें आपसे ईमेल के ज़रिए आपकी जानकारी जैसे बैंक का ख़ाता, पासपोर्ट नंबर मांगा जाता है आम है.

आपके कंप्यूटर में अगर एंटी-वायरस नहीं है तो कोई भी साइबर अपराधी आपके डाटा की चोरी कर सकता है और फिर इस जानकारी का इस्तेमाल एक झूठी आईडी बनाने के लिए कर सकता है.

वेबकैमरे की हैकिंग

साइबर अपराधी आपके वेबकैमरे को हैक कर सकते हैं या फिर आपके कीबोर्ड पर आप जो टाइप करते हैं उसे रिकॉर्ड कर सकते हैं. किसी कंप्यूटर जानकार के लिए ये काफ़ी आसान है.

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कई सरकारी एजेंसिया भी सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा करती हैं लेकिन सरकारी एजेंसी और हैकर में बड़ा अंतर होता है क्योंकि हैकर आपके डाटा का इस्तेमाल कर ब्लैकमेल कर सकता है.

हॉलीवुड की एक मशहूर अदाकारा की निजी तस्वीरों को उनके फ़ोन से उस वक्त हैक कर लिया जब उन्होनें अपना फ़ोन एक पब्लिक कंपयूटर में चार्जिंग के लिए लगाया.

उन तस्वीरों को वापिस पाने के लिए अदाकारा को लाखों डॉलर देने पड़े थे लेकिन अधिकतर मामलों में हैकर्स तस्वीरें वायरल कर देते हैं.

भारत के हालात

विभिन्न संस्थाओं के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में साइबर अपराधों की दर 40-50 प्रतिशत तक बढ़ी है और अगले आंकड़े आने तक इसमें 100 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है."

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भारत में आईटी एक्ट 2008 लागू है. हर ज़िले में साइबर पुलिस स्टेशन है और मई 2013 में नेशनल साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी भी लागू की गई है लेकिन साइबर अपराध को रोकने में कमी नज़र आती है.

साइबर अपराधों को रोकने के लिए विशेषज्ञों की टास्क फ़ोर्स बनाई जाए और साथ ही केंद्रीय साइबर सुरक्षा सेल बनाया जाए ताकि तेज़ सूचना का आदान-प्रदान एक केंद्र से दूसरे केंद्र में हो सके.

कैसे बरतें एहतियात

अगर स्कूल लेवल से ही बच्चों को साइबर क्राइम के बारे में जागरूक किया जाए तो वे सजग हो सकते हैं. इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए एक 24X7 की हेल्पलाइन होनी चाहिए.

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इस तरह हेल्पलाइन के ज़रिए पुलिस स्टेशन तक जाने में लगने वाले कीमती वक्त को बचाया जा सकता है और शायद डाटा भी.

अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड की जानकारी किसी के साथ बांटनी नहीं चाहिए, अपने कंप्यूटर और मोबाइल या हार्ड डिस्क जैसी चीज़ो को पासवर्ड और एंटी वायरस से सेफ़ रखें.

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