जयपुर में लगा साहित्य प्रेमियों का मेला

  • 22 जनवरी 2015
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कड़ाके की सर्दी और ठंडी हवाओं के बीच जयपुर के डिग्गी पैलेस में साहित्य प्रेमी, लेखक, स्कूली बच्चे और विदेशी लोगों का जमावड़ा लगा है.

मौक़ा है जयपुर साहित्य सम्मेलन के आठवें संस्करण का जिसकी बुधवार को शुरुआत हुई.

नगाड़े की थाप और राजस्थानी सजावट से रोशन माहौल में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और एस्सेल ग्रुप के प्रमुख डॉ.सुभाष चन्द्र ने कार्यक्रम का शुभारम्भ किया.

कवि की कल्पना

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उद्घाटन सत्र कवि की कल्पना को समर्पित रहा. कवि विजय शेषाद्री, केदारनाथ सिंह और अनुवादक अरविन्द कृष्ण महरोत्रा इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थे.

उत्सव के आयोजक संजय के. रॉय ने बताया कि विश्व के सबसे बड़े और “निशुल्क” उत्सव में कविता के साथ-साथ सिनेमा में साहित्य, कला, स्त्री विमर्श और ऐसे विषयों पर चर्चा होगी जिन पर आमतौर पर बात नहीं होती.

इस साल के उत्सव में शामिल हो रहे देश विदेश के बड़े नामों में नोबेल पुरस्कार विजेता वी एस नॉयपाल, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, जावेद अख्तर, शबाना आज़मी, नसीरुद्दीन शाह, प्रसून जोशी, चेतन भगत, अमीश त्रिपाठी, नयनतारा सहगल, बीते ज़माने की मशहूर अभिनेत्री वहीदा रहमान, और अभिनेता गिरीश कर्नाड भी शामिल हैं.

कठपुतली से लेकर बॉलीवुड तक

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उत्सव के सह-निदेशक नमिता गोखले और विलियम डैलरिंपल ने बताया कि इस साहित्य सम्मेलन में 300 से अधिक वक्ता राजस्थानी कठपुतलियों से लेकर ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी ऐबरिजनी और बॉलीवुड सहित अनेक विषयों पर चर्चा करेंगे.

हिंदी लेखिका मृदुला बिहारी मानती हैं कि यह उत्सव ऐसा है जहाँ कोई ऊँच नीच, बड़े छोटे का भाव नहीं है. लेखक ओम थानवी भी मानते हैं कि जयपुर साहित्य उत्सव ने देश के और हिस्सों में भी साहित्य उत्सवों के आयोजन को बढ़ावा दिया है.

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कवि और अनुवादक अरविन्द कृष्ण महरोत्रा इस उत्सव में हमेशा से शिरकत करते रहे हैं पर उन्हें इस बात की कमी खलती है कि उत्सव में बांग्ला, मराठी या दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व नहीं दिखाई पड़ता.

बाल साहित्य पर काम करनेवाली अर्शिया सत्तार को लगता है जयपुर साहित्य उत्सव बच्चों को किताबों की दुनिया से जोड़ता है. उन्होंने कहा, "यह बच्चे लेखक भले ना बनें पर पाठक ज़रूर बनेंगे. और यह कोई कम बड़ा योगदान नहीं. "

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जयपुर में अब पांच दिन तक सभी रास्ते डिग्गी पैलेस को ही जाएंगे. चाहे न्यूयार्क से आई हुई दीप्ति हो या न्यूजीलैंड की निकोलिया सबके लिए यहां आना बेहद सुखद है.

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