भारत कभी सेक्युलर नहीं था: शिवसेना

  • 28 जनवरी 2015
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गणतंत्र दिवस पर अख़बारों में छपे एक विज्ञापन को लेकर विवाद गहरा गया है जिसमें संविधान की प्रस्तावना से 'धर्मनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' शब्द ग़ायब थे.

विपक्षी कांग्रेस ने जहां इस मुद्दे पर प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी से सफ़ाई मांगी है, वहीं एनडीए की सहयोगी शिवसेना का कहना है कि भारत कभी सेक्युलर नहीं था.

शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा, "ये देश कभी सेक्युलर नहीं था. 1947 में विभाजन धर्म के आधार पर हुआ है और पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना है. पाकिस्तान मुसलमानों के लिए बना है तो हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए है. तो ये देश सेक्युलर नहीं है."

वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर सफाई मांगी है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है, "प्रधानमंत्री स्वयं और अपनी सरकार का रुख 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्षता' को लेकर स्पष्ट करें जिन पर बार बार संशय उठ रहा है."

मोदी से मांगी सफाई

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इस पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि 'देश सेक्युलर है और हमेशा बना रहेगा.'

उन्होंने कहा कि 'सेक्युलर' और 'सोशलिस्ट' ये दोनों शब्द संविधान की मूल प्रस्तावना में नहीं थे.

उनके अनुसार, "संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द 1976 में 42वें संशोधन के ज़रिए जोड़े गए थे, क्या इसका ये मतबल है कि इससे पहले की सरकारें सेक्युलर नहीं थीं."

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