एक ओलंपिक ग्रामीण खेलों का भी

किला रायपुर खेल उत्सव

पंजाब के एक छोटे सा गांव किला रायपुर में गुरुवार को सालाना 'ग्रामीण ओलंपिक्स' शुरू हो गए हैं.

लुधियाना शहर से महज़ 18 किलोमीटर दूर किला रायपुर में इस अनोखे खेल मेले की शुरुआत 1933 में हुई थी.

गांव के ही ग्रेवाल परिवार ने इन खेलों की शुरुआत तब की जब 1932 में भारत की हॉकी टीम लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स से स्वर्ण पदक लेकर लौटी थी.

विदेशी खिलाड़ी, दर्शक भी

किला रायपुर उत्सव की शुरुआत में इसमें हॉकी और कबड्डी जैसे खेल थे. लेकिन धीरे-धीरे इनमें गांव से जुड़े अन्य खेल भी शामिल होने लगे.

आज भी दो घोड़ों की सवारी, घोड़े पर बैठ निशानेबाज़ी, घुड़सवारी बेहद लोकप्रिय हैं.

इन खेलों में न केवल पंजाब से बल्कि हरियाणा, राजस्थान और यहां तक विदेशों से भी लोग हिस्सा लेने आते हैं.

इस बार इंटरनेट पर इनके बारे में पढ़कर कई विदेशी सैलानी भी इन्हें देखने पहुंचे.

इस बार के ग्रामीण ओलंपिक्स ने सुर्खियां तब बटोरीं जब यहां होने वाली बैलगाड़ी दौड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी.

आयोजकों का कहना है कि बैलगाड़ी दौड़ गांव का और गरीबों का खेल तो था ही इन खेलों की पहचान भी था.

इस बार के खेलों में अन्य प्रतियोगिताओं को शामिल किया गया जैसे कि ट्रैक्टर रेस, ट्रैक्टर ट्राली खींचना और कुत्तों की रेस.

इन खेलों में जीते जाने वाली कुल इनाम राशि 35 लाख है. इन खेलों को भारत की बड़ी कंपनियां स्पॉंसर भी करती हैं.

चार दिन तक चलने वाले इन खेलों का मज़ा अंतिम दो दिन में आता है जब किला रायपुर स्टेडियम खचाखच भर जाता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार