जयंती नटराजन का राहुल पर हमला: 12 बिंदु

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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंती नटराजन ने मनमोहन सिंह सरकार से वन और पर्यावरण राज्य मंत्री के पद से इस्तीफ़े के बाद पैदा हुई परिस्थितियों को रेखांकित किया है.

कांग्रेस अध्यक्ष को सोनिया गांधी को संबोधित उनकी चिट्ठी को अंग्रेज़ी के अख़बार 'द हिंदू' ने प्रकाशित किया है. पिछले साल पांच नवंबर को लिखी गई इस चिट्ठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निशाना बनाया गया है.

जयंती का कहना है कि उनके मंत्री रहते हुए उनसे एक बार गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर स्नूपगेट मामले में आरोप लगाने के लिए कहा गया. इस पर मैंने कहा कि पार्टी को मोदी की सरकार और उसकी नीतियों पर बात करनी चाहिए न की किसी अज्ञात महिला को विवाद में घसीटना चाहिए.

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जयंती की चिट्ठी के मुख्य बिंदु

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1. अजय माकन ने 16 नवंबर 2013 को मुझे फोन पर दिल्ली आकर स्नूपगेट मामले में संवाददाता सम्मेलन करने को कहा. मैंने उनसे कहा कि इस विषय पर सरकार की जगह पार्टी के किसी व्यक्ति को बात करनी चाहिए. इस पर अजय माकन ने कहा कि यह फ़ैसला ऊपर से लिया गया है. इसके बाद मैंने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

2. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 20 दिसंबर 2013 को मुझे अपने दफ्तर बुलाकर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार जयंती की पार्टी को जरूरत हैं, इसलिए मैं इस्तीफ़ा दे दूं. इसके बाद बिना कुछ कहे या संदेह किए मैंने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इस्तीफ़ा स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने मुझे एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने मंत्री के रूप में मेरे काम की तारीफ़ की.

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Image caption जयंती नटराजन ने यह चिट्ठी पिछले साल पांच नवंबर को लिखी थी.

3. मैंने आपसे (सोनिया गांधी से) मिलने का समय मांगा तो टेलीफ़ोन पर मेरी आपसे बात कराई गई. इस दौरान आपने बार-बार वहीं बात दोहराई जो प्रधानमंत्री मुझसे कह चुके थे कि मुझे पार्टी के कामों के लिए इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

4. अगले दिन मेरा इस्तीफ़ा मीडिया में सुर्खियां बना. लेकिन दोपहर होते-होते मुझे पता चला कि राहुल गांधी के कार्यालय का कोई व्यक्ति मीडिया को यह बता रहा है कि जयंती का इस्तीफ़ा पार्टी कार्यों के लिए नहीं था. उसी दिन राहुल गांधी ने फिक्की के एक कार्यक्रम में औद्योगिक परियोजनाओं को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिलने में हो रही देरी की बात कही. उन्होंने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि सरकार और पार्टी यह व्यवस्था करेगी कि परियोजनओं को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिलने में देरी न हो.

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5.इसके बाद राहुल गांधी को मैंने मंत्रालय से हटाए जाने और फ़िक्की में उनके भाषण लेकर एक संदेश भेजा और इसका कारण जानना चाहा. इस पर उन्होंने कहा कि वो थोड़ा व्यस्त हैं और बाद में जवाब देंगे. लेकिन कई बार अनुरोध के बावजूद उन्होंने आजतक कोई जवाब नहीं दिया.

6. जनवरी 2014 में मेरी आपसे (सोनिया गांधी) मुलाक़ात हुई. इस दौरान आपने कहा कि आने वाले चुनावों के लिए आपकी पार्टी को ज़रूरत है.

7. जनवरी में ही मुझे कांग्रेस मीडिया सेल के प्रमुख अजय माकन ने सूचना दी कि मुझे कांग्रेस के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया है, जिसका निर्वाह मैं पिछले दस साल से ज़िम्मेदारी से कर रही थी.

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8.राहुल गांधी ओडिशा के नियमगिरि हिल्स गए. वहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वो डोगरिया कोंध आदिवासियों के सिपाही हैं. वो वेदांता के हाथों उनके हितों का गला घोंटने नहीं देंगे. इसके बाद मुझे राहुल गांधी के दफ़्तर से इस मामले को देखने को कहा गया. इस पर मैंने वेदांता को दी गई पर्यावरण मंजूरी को खारिज कर दिया, हालांकि इसके खिलाफ मेरे कैबिनेट सहयोगियों का मेरे ऊपर दबाव था.

9.प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी मेरे और मेरे मंत्रालय के अधिकारियों के नियमित संपर्क में थे. वो हिमाचल प्रदेश में धारी देवी मंदिर के पास जीवीके के बिजली संयंत्र, महाराष्ट्र के लावासा परियोजना, गुजरात में निरमा के सीमेंट संयत्र और कुछ अन्य परियोजनाओं को लेकर निर्देश दिया करते थे.

10.मेरे इस्तीफ़े के बाद केरल के अखबारों में यह बात प्रमुखता से आई कि 19 दिसंबर 2013 को कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट के आधार पर वेस्टर्न घाट के संरक्षण को लेकर जारी अधिसूचना की वजह से मुझे मंत्रिमंडल से हटाया गया है. मेरे इस फ़ैसले का केरल के कुछ तबके में विरोध हुआ. उन्हें लगता था कि इस अधिसूचना से उनके आर्थिक हित प्रभावित होंगे. इन लोगों ने आपसे (सोनिया गांधी) और प्रधानमंत्री से अपनी चिंता जताई.

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11.मेरी जगह पर मंत्री बनाए गए वीरप्पा मोइली ने मेरे सभी फ़ैसलों को रोक दिया. मंत्रालय से हटाए जाने कुछ दिन पहले समीक्षा के लिए मैंने अडानी की फ़ाइल मंगाई. लेकिन मुझे बताया गया कि वह गायब है. मेरे अधिकारियों ने खोजबीन के बाद पाया कि वह फ़ाइल कंप्यूटर सेक्शन के वाशरूम में रखी है. इससे लगता है कि मेरे मंत्रालय के कुछ अधिकारी अज्ञात कारणों से वह फ़ाइल मेरे पास नहीं भेजना चाहते थे.

12.पिछले 11 महीनों में मैं मानसिक और शारीरिक यंत्रणा से गुजरी हूं. तनाव और अपमानित किए जाने की वजह से मुझे गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है. अब मुझे अपना भविष्य निराशजनक दिखाई दे रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुझे अपने परिवार की पंरपरा को बचाना है, नहीं तो मेरे बच्चे या मेरी आने वाली पीढ़िया मुझे माफ़ नहीं करेंगी.

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