अब कहां जाएंगी जयंती नटराजन?

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21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के पहले के कुछ क्षणों में जयंती नटराजन उनके साथ मौजूद थीं, क़रीब 24 साल बाद जयंती नटराजन ने राजीव की पत्नी की देखरेख में चल रही पार्टी और उनके बेटे राहुल गांधी से त्रस्त होकर ‘कांग्रेस छोड़ दी.’

2014 आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ‘जयंती टैक्स’ की बात कर रहे थे, शुक्रवार को दिल्ली में चर्चा हो रही थी कि नटराजन भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रही हैं!

शुक्रवार को चेन्नई में एक प्रेस वार्ता में नटराजन ने स्पष्ट कर दिया, "किसी राजनीतिक दल को ज्वाइन करने का उनका कोई इरादा नहीं है."

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि फ़िलहाल वो अपनी ज़िंदगी और भविष्य के बारे में सोच-विचार करना चाहती हैं.

गहन सोच-विचार की ज़रूरत हाल के दिनों में उनकी ज़िंदगी में लगातार बनी रही है. नरेंद्र मोदी सरकार बनने के कुछ माह में ही ख़बरे आने लगीं कि सीबीआई नटराजन के कार्यकाल के कामकाज की जांच करेगी.

राहुल की टीम पर आरोप

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मनमोहन सिंह हुकूमत में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रह चुकीं नटराजन का आरोप है कि हालांकि उन्होंने मंत्रालय में कामकाज कांग्रेस पार्टी की ‘जंगल और आदिवासी हितों की रक्षा की नीति के अनुकूल की‘ लेकिन बाद में उन्हें पार्टी, मीडिया और राहुल गांधी के क़रीबी लोगों के ज़रिए बदनाम किया गया.

सोनिया गांधी को कई माह पहले लिखे गए उनके ख़त में जिसके कुछ हिस्से अंग्रेज़ी दैनिक हिंदू में छपे हैं. नटराजन ने शिकायत की है, "उनके पास राहुल गांधी के कार्यालय से निर्देश आते थे."

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जयंती के आरोपों पर कहा, "ये ख़त इस बात को साबित करता है कि ये क़ानूनी प्रक्रिया नहीं थी जो सत्ताधारी पार्टी की नज़र में मायने रखता था. बल्कि ये बात कि कुछ नेता क्या चाहते थे. किस प्रोजक्ट को मंज़ूरी मिले, किसे नहीं ये उनकी ख़ुशी पर निर्भर करता था."

उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर ‘क्रॉनी कैपिटलइज़्म’ चलाने का आरोप लगाया. क्रॉनी कैपिटलइज़्म ऐसी पूंजीवादी व्यवस्था को कहते हैं जिसमें सरकार नियम-क़ायदों को नज़रअंदाज करके पूंजीपतियों के हित में काम करती है.

आदिवासी और जंगल हित

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जब नटराजन से पूछा गया कि क्या राहुल गांधी के आफ़िस से उन्हें ख़ास प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी देने के लिए निर्देश आते थे तो उन्होंने कहा कि ये निर्देश स्वंयसेवी संस्थाओं के पर्यावरण सरोकारों के बारे में या आदिवासी और जंगल हितों के बारे में होते थे.

राजनीतिक विश्लेषक विनोद शर्मा कहते हैं, "वर्तमान सरकार मंत्रालय के फ़ैसले को प्रभावित करने के आरोप को क़ानूनी और राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी, ख़ासतौर पर तब, जब दिल्ली विधानसभा के चुनाव जारी हैं."

पर्यावरण मंज़ूरी के लिए मंत्रालय में आई एक फ़ाइल के बाथरूम में पाए जाने की बात सामने आई है. बाद में कहा गया कि वो अडानी समूह से संबंधित फ़ाइल थी जिन्हें वर्तमान प्रधानमंत्री का क़रीबी बताया जाता है.

पलटवार

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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने जयंती के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें उस आरोप का जवाब देना चाहिए जो नरेंद्र मोदी ने उनपर लगाए थे.

नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था, "हम सबने आयकर, बिक्री और आबकारी टैक्स के बारे में सुना है, लेकिन हमने पहली बार जयंती टैक्स के बारे में सुना है जिसके बिना दिल्ली में कुछ भी यहां से वहां नहीं जा सकता है."

तमिलनाडु की राजनीति पर नज़र रखनेवालों का कहना है कि नटराजन के क़दम को सूबे में बीजेपी की राजनीति से जोड़कर देखा जाना चाहिए जहां पार्टी अपनी ज़मीन बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

चेन्नई में स्थानीय पत्रकार केवी लक्ष्मण कहते हैं कि सूबे की क्षेत्रीय दल अकाली दल और शिव सेना की स्थित देखकर बीजेपी के साथ जाने से थोड़ा घबराते हैं और बीजेपी शायद चाहती है कि वो नए चेहरे तलाशें.

पीढ़ियों का रिश्ता

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नटराजन ने चेन्नई में ये भी कहा कि उनका परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है और उन्हें ये रिश्ता समाप्त करते हुए बहुत दुख हो रहा है.

लेकिन वो 1990 के दशक में कांग्रेस छोड़कर जीके मूपनार के राजनीतिक दल तमिल मनिला कांग्रेस में चली गई थीं और यूनाइटेड फ्रंट की मिली जुली सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुकी हैं.

हालांकि विनोद शर्मा कहते हैं कि नजराजन का बीजेपी ने जाना मुश्किल होगा क्योंकि मोदी ख़ुद उनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुके हैं.

लेकिन किरण बेदी का उदाहरण भी तो लोगों के सामने है. हां, ये ज़रूर था कि इस मामले में आरोप बेदी की तरफ़ से लगाए थे!

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