दिल्ली चुनाव: 'सुरक्षा का मुद्दा तय करेगा मेरा वोट'

दिल्ली चुनाव में अब केवल दो दिन बचे हैं. पिछले 10-15 दिनों में बीबीसी हिंदी की टीम ने दिल्ली के कई इलाक़ों में जाकर ये जानने की कोशिश की है कि महिलाओं के लिए सबसे अहम चुनावी मुद्दे कौन से हैं. आइए नज़र डालते है.

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  • मोनिका अग्रवाल

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    रोज़गार मोनिका के लिए एक अहम मुद्दा है: 'अगर आपके पास नौकरी है तो ज़िंदगी में कई चीज़ें आसान हो जाती हैं. रोज़गार एक बुनियादी ज़रूरत है.'

  • रोमालिसा

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    रोमाालिसा पानी की उपलब्धता को शहर का इकलौता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानती हैं. उनका ये भी कहना हैं: 'मैं दिल्ली को भ्रष्टाचार मुक्त शहर के तौर पर देखना चाहती हूं. महिलाओं की सुरक्षा भी एक समस्या है.'

  • अनीता शर्मा

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    नई दिल्ली में दुकान चलाने वाली अनीता कहती हैं कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उनके वोट का फैसला करेंगी लेकिन उनकी और भी जरूरतें हैं: 'मैं चाहती हूं कि महंगाई रुके. हम किराये के घर में रहते हैं. मेरी ख्वाहिश है कि हमारा अपना घर हो.'

  • सान्या मनोहक

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    सान्या के लिए सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है और इसी के बिना पर वे अपने वोट का फैसला करेंगी.

  • संतोष नारायण

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    ये दुकानदार अपने इलाके में साफ़ पानी चाहते हैं: 'बिजली और पानी की समस्या से मैं परेशान हो गया हूं. महंगाई भी एक बड़ी मुश्किल है. लेकिन मेरा सबसे बड़ा मुद्दा पानी है.'

  • शानु वाधवा

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    शाानु एक गृहणी हैं और कहती हैं कि कानून व्यवस्था उनकी पहली चिंता है: 'दूसरा मुद्दा स्वच्छता का है, तीसरा आबादी के नियंत्रण का है. प्रवासन भी एक महत्वपूर्ण समस्या है और इस पर लगाम लगाई जानी चाहिए.'

  • अनीता केसकर

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    पेशे से शिक्षक अनीता कहती हैं कि वे स्थायीत्व के सवाल पर अपने वोट का फैसला करेंगी.

  • सृष्टि

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    एक वकील के तौर पर सृष्टि के लिए कानून व्यवस्था पहली चिंता है: 'कानून और न्याय व्यवस्था मजबूत और सभी के लिए निष्पक्ष होनी चाहिए. नहीं तो अपराधियों को कभी सबक नहीं मिलेगा.'

  • विभूति कुमार

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    मनोविज्ञान के छात्र विभूति के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा था.

  • लता

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    लता के क्षेत्र में बिजली की निर्बाध आपूर्ति एक बड़ी समस्या है लेकिन उनका ये भी कहना है कि महंगाई से भी उन पर असर पड़ता है.

  • दामिनी बजाज

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    सुरक्षा दामिनी के लिए पहली चिंता है.

  • रमा बाई

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    फलों की रेहड़ी लगाने वाली रमा बाई अच्छी ज़िंदगी जीना चाहती हैं. इन चुनावों में रोज़गार और नौकरी उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. वो नगर निगम से एक स्थाई लाइसेंस चाहती हैं ताकि वे बेरोकटोक फल बेच सकें.

  • काजल

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    काजल पढ़ाई करती हैं और कहती हैं कि बिजली, पानी और महंगाई उनकी चिंताओं में शामिल हैं : 'मैं कहना चाहती हूं कि हमें बिजली और पानी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. महिलाओं की सुरक्षा भी एक मुद्दा है. उनके साथ बुरा बर्ताव होता है. इससे निपटने के लिए सख्त कानून होने चाहिएं.'

  • नैना शर्मा

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    सुरक्षा. यही एक मुद्दा है जिस पर नैना अपने वोट का फैसला करेंगी.

  • अनंत खुराना

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    पेशे से शिक्षक अनंत सुरक्षा के लिए सबसे अधिक चिंतित थे.

  • फ़्लोरा

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    फ़्लोरा पढ़ाई करती हैं. वे चाहती हैं: 'पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए और लोगों के पास नौकरी हो.'

  • लता नय्यर

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    दिल्ली में सड़कों की स्थिति और ट्रैफ़िक की व्यवस्था उनकी सबसे बड़ी चिंता थी. लता कहती हैं: 'हम चाहें कितने ही अंडरपास, फ़्लाई ओवर बना लें या सड़कों को चौड़ा कर लें, अगर सड़कों की क्वालिटी अच्छी नहीं हुई और ट्रैफ़िक व्यवस्था दुरुस्त नहीं रही तो हम हमेशा ही ट्रैफ़िक की परेशानी का सामना करते रहेंगे और यहां तक कि दुर्घटनाएं भी होती रहेंगी.'

  • बबिता

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    महंगाई बबिता के लिए एक अहम मुद्दा है: 'हम केवल इतना चाहते हैं कि हमारी गृहस्थी ठीक से चलती रहे लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण हम ऐसा नहीं कर सकते. महंगाई से निपटने लायक आमदनी भी नहीं बढ़ी है.'

  • शिखा

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    पेशे से वकील शिखा के लिए स्वच्छता (न कि स्वच्छता को लेकर केवल अभियान) एक प्रमुख मुद्दा है. शिखा कहती हैं: 'कोई वास्तविक बदलाव नहीं हुआ है. स्वच्छता को एक आदत के तौर पर सिखाये जाने की जरूरत है, शुरुआत से ही जिंदगी जीने के तरीके की तरह बताए जाने की जरूरत है. जो नियमों का पालन नहीं करते, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए.'

  • वर्षा खुराना

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    श्रीमति खुराना एक गृहणी हैं. वे कहती हैं: 'जब तक कि व्यवस्था भ्रष्टाचार मुक्त न हो जाए, हम कभी विकसित नहीं होंगे.'